रियल हीरो जांबाज फौजी छविराम कश्यप

कानपुर, उत्तर प्रदेश (Kanpur, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट, 17 नवम्बर 2018। आज हम आपको एक सच्ची घटना की जानकारी देने जा रहे हैं, जो एक फौजी को रियल हीरो बनाती है। यह फौजी है छविराम कश्यप।
घटना करीब पौने दो साल पुरानी है।
2 फरवरी 2017 कानपुर को देहात की एक लड़की को अब्दुल रहीस नाम के लड़के ने अगवा किया और उसे नशे की गोली खिलाकर मुंबई लेकर चला गया। जब लड़की को होश आया तो उसने अपने आप को कल्याण स्टेशन मुंबई में पाया। अब्दुल रहीस वहाँ से उस लड़की को लेकर मुंब्रा में पहुंचा। लड़की ने किसी तरह ने भाई को मैसेज छोड़ा कि मैं कल्याण स्टेशन से मुंब्रा एक जगह है, जहां पर मुझे रखा है, प्लीज मुझे यहां से ले जाओ, मुझे बहुत डर लग रहा है। 
लडक़ी का भाई फौजी छविराम का दोस्त था। उसने यह सारी बात फौजी छविराम को बताई। उस समय फौजी छविराम की ड्यूटी जबलपुर में थी।फौजी छविराम ने तुरंत 3 दिन की छुट्टी लेकर अपने दोस्त के साथ मुंबई पहुंच गए। वहां पर उनकी राजन चौधरी, संजीव चौधरी और उनके भाई संतोष चौधरी से मुलाकात हुई। उन लोगों के साथ मिलकर उस लड़की की जांच पड़ताल करने लगे, पर वहां की पुलिस साथ नहीं दे रही थी, उनका कहना था कि आपके जिले की जब पुलिस यहां पर आएगी तभी हम सर्च अभियान चालू करेंगे।
        3 दिन पूरे होने को थे पर लड़की का पता नहीं लगा। फौजी छविराम वापस जबलपुर चले गए। फिर उनसे रहा नहीं गया। उन्होंने अपने सीओ को सारी बात बताई और 2 महीने की छुट्टी लेकर फिर मुंबई पहुंच गए। इस बार उन्होंने ठान लिया था कि चाहे जो भी हो जाए लड़की को बचाना है। उनके सीईओ ने सख्त आदेश दिए थे कि लड़की का मामला है, इसमें अगर किसी ने गलत में फंसा दिया तो इसमें तुम्हारा कोर्ट मार्शल भी हो सकता है। पर फौजी छविराम कश्यप का जिगरा बहुत ही मजबूत था। उन्होंने कहा जो होगा सर देखा जाएगा। लेकिन इस वक्त एक लड़की की इज्जत का सवाल है। और वह निकल पड़े उसको ढूंढने  के लिए। और मुंबई में राजेंद्र चौधरी की मदद से उन्होंने वहां के प्रशासन से मदद ली। और कल्याण के एसपी साहब से जाकर मिले। वहां के पुलिसकर्मीओं ने बहुत ही मदद की। तारीख 14 हो चुकी थी पर लड़की का कोई पता नहीं लगा था। लोकेशन ट्रैक कर लिया गया था, पर यूपी की पुलिस ना आने की वजह से वहां की पुलिस पूरी तरीके से मदद नहीं कर पा रही थी। फौजी छविराम ने एक बहुत ही कठिन कदम उठाया और उन्होंने हंड्रेड डायल किया। फिर सारी घटना हंड्रेड डायल पर बताईं और कहा अगर लड़की नहीं मिली तो मैं ऐसे नहीं जाऊंगा, लड़की को लेकर ही जाऊंगा। अधिकारियों ने आश्वासन दिया। 24 घंटे के अंदर 16 फरवरी को 3:45 पर मुंब्रा में लड़की को ढूंढ निकाला। यूपी की पुलिस इस वजह से नहीं आ पा रही थी क्योंकि 2 फरवरी 2017 में विधानसभा के चुनाव चल रहे थे। पकड़ने के बाद अपराधियों को मुंब्रा पुलिस स्टेशन में रखा गया।  4 दिन बाद उत्तर प्रदेश पुलिस वहां पहुंची, तब वहां से अपराधी को कानपुर देहात लाया गया। आज भी वे अपराधी कानपुर देहात की माती जेल में बन्द हैं।
      यह जिगरा फौजी छविराम कश्यप का देखते बनता है। उन्होंने अपनी नौकरी दाब पर पूरी ताकत से लगा रखी थी, लेकिन उनका यह मिशन सफल हुआ। कहते हैं फौजी जिस काम में लगता है उसको पूरा करके ही मानता है, और यह फौजी छविराम कश्यप ने साबित कर दिखाया। रियल हीरो फौजी छविराम कश्यप इस जमाने के हीरो फौजी ही होते हैं जैसा कि फौजी छविराम कश्यप ने किया है।
      फौजी छविराम कश्यप ने 2 फरवरी से लेकर 16 फरवरी 2017 तक रात दिन जाग कर उस लड़की का सर्च अभियान किया। उन्होंने इन 16 दिनों में थाना जिला कल्याण, जिला मुंब्रा, डोंबिवली, कुर्ला, गोरेगांव सहित तकरीबन 10 बड़े बड़े जगहों पर सर्च अभियान किया। उनका यह सर्च अभियान सफल हुआ। ऐसे फौजी को दिल से सलाम। जय हिंद, जय भारत।