निषाद पार्टी की आलोचना करने वालों को महामना डॉ. संजय कुमार निषाद जी करारा जबाब

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश (Gorakhpur, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट, 29 नवम्बर 2018। अक्सर लोग सवाल करते हैं कि निषाद पार्टी, जो अबतक समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी की धुर विरोधी रही है, और इन पार्टियों को अपने मंच से आलोचना का निशाना बनाती रही है, अचानक ऐसा क्या हो गया कि निषाद पार्टी ने उन्हीं पार्टियों से गठबंधन कर लिया ? और इस तरह के सवाल अक्सर अपरिपक्व गैर राजनैतिक मछुआरे ही करते हैं।
       ऐसे सवाल करने वालों को पता होना चाहिए कि, न तो निषाद पार्टी ने अपना एजेण्डा तब्दील किया है और न ही किसी को वाक ओवर दिया है। और रही समझौते या गठबंधन की बात तो यह सब उसी सूरत में मुमकिन हुआ है जब इन पार्टियों ने निषाद पार्टी और डा. संजय कुमार निषाद जी को उत्तर प्रदेश की राजनैतिक गलियारों में एक मजबूत और भरोसे मन्द राजनैतिक ताकत के रूप में अंगीकार एवं स्वीकार कर लिया है।
    राजनीति में यों ही कोई किसी को अंगीकार वह स्वीकार नहीं करता है। सभी पार्टियों को बखूबी जानकारी हो चुकी है कि निषाद पार्टी सिर्फ अखबार या सोशल मीडिया में ही नहीं, बल्कि जमीन पर अनुशासनात्मक कैडर तैयार कर सड़क एवं जमीन पर उतर कर जनहित के मुद्दों पर प्रदर्शन करती रही है और समाज के उस तबके की आवाज बनती रही है, जिसे आजादी के बाद से अबतक उनका वाजिब हक दिलाने के लिए किसी भी राजनैतिक दल ने आवाज नहीं उठाई।
         चूंकि सवाल करने वाले आमतौर पर मछुआ समुदाय के लोग ही होते हैं। खासतौर से भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस के निचले पायदान के अंधभक्त कार्यकर्ता हैं। जिन्हें शायद पता ही नहीं कि आर्यों, मुगलों औ अंग्रेजों से लोहा लेने वाले शूरवीर अमर शहीद तिलका मांझी, सिद्धो मांझी, मैकू एवं भीमा मल्लाह, शंकर एवं भवानी तोपची, समाधान एवं लोचन निषाद, महारानी बिलासी देवी केवटीन, महारानी रासमणी निषाद, महारानी दुर्गावती गोंड, गंगा दीन निषाद, निषाद ऊधम सिंह, रानी अवंती बाई, आदि के साथ तरह तरह की लालच एवं यातनाएं भी दी थीं। और चाहा था कि आप मूलवासी क्रान्तिकारी अपने एजेण्डे, अपनी लड़ाई से पीछे हट जायें।लेकिन वह दुश्मन नाकाम रहे।
          निषाद पार्टी गठबंधन के बाद भी पहले की तरह ही अपने एजेण्डे पर पूरी मजबूती के साथ कायम है, और लगातार जन सहयोग के साथ आगे बढ़ रही है।

जानिए कैसे निषाद पार्टी आज सबसे अलग और मजबूत है
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मजबूत कैडर तैयार करने के लिए लगातार प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाते हैं। इसी क्रम में पार्टी के प्रांतीय कार्यालय मौथरी रोड, कुरौली चौराहा, लखनऊ फैज़ाबाद नेशन हाई वे बाराबंकी में 30 नवम्बर से 2 दिसंबर 2018 तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है। इस शिविर में 10 आरक्षण आंदोलन रैली के तैयारी हेतु निषाद पार्टी का शिक्षण प्रशिक्षण ( विशेष प्रकार का कैडर) होना है।
     
इस कैडर कार्यक्रम में फुलटाइमर प्रचारक, वक्ता गण, राष्ट्रीय कमेटी, प्रदेश कमेटी के सभी मोर्चों एवं प्रकोष्ठों के सभी पदाधिकारी, मण्डल कमेटी, जिला कमेटी, विधान सभा कमेटी, ब्लाक कमेटी के वर्तमान एवं पूर्व के सक्रिय व उदासीन कार्यकर्ता एवं पदाधिकारियों की उपस्थिति अपने साथियों सहित अनिवार्य है।

जानिए कौन हैं महामना डॉ. संजय कुमार निषाद
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महामना डॉ. संजय कुमार निषाद जी एक ऐसे मसीहा हैं, जिन्होंने आदिवासी, मूलवासी शोषित, वंचित मछुआ समुदाय (निषाद कश्यप समाज) की वर्षों से बिखरीं "578 जातियों" को एक करने के लिए एक ढाल के रूप में कार्य करने का बीड़ा उठाया है।
      गोरखपुर के रामगढ़ के महाराजा सिंहानु निषाद की बात हो या स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लोचन निषाद और समाधान निषाद की, इस जाति का गौरव हर काल में देखने को मिला है। अगणनीय उदाहरण हैं निषादों के गौरव और बलिदान के। लेकिन आज के दौर में इस जाति का समाजिक रूप से पतन हो रहा था उसके लिए किसी न किसी को तो एक दिन मसीहा बनकर तो आगे आना ही था।
     तो जानिए एक ऐसे शख्स के बारे में जिसने आज के समय में आदिकवि महर्षि बाल्मीकि, विश्वगुरू महर्षि वेद व्यास, सृष्टि के रचयिता महर्षि कश्यप, भक्त प्रह्लाद, निषादराज वीर एकलव्य और रामसखा महाराजा श्री गुह्यराज निषाद जी जैसे इस "पंचम वर्ण" के महान गौरवशाली विभूतियों के गौरव को सुरक्षित करने एवं निषादवंश की जाति के लिए एक ढाल के रूप में कार्य करने का बीड़ा उठाया।
     आज के युग के इस पंचम वर्ण के मसीहा एवं "निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल" (N.I.S.H.A.D पार्टी) के संयोजक/राष्ट्रीय अध्यक्ष जिनका नाम है महामना डा.संजय कुमार निषाद जी, गोरखपुर के ग्राम “जंगल बब्बन” तहसील “कैम्पियरगंज” में इस महान निषाद वंश के नायक का जन्म 7 जून सन् 1965 को हुआ था। पिता सूबेदार मेजर "विजय कुमार निषाद" औऱ माता "सुधा निषाद" के आदर्शों का असर महामना डॉ संजय निषाद जी में बचपन से ही था।
   शायद डॉ संजय निषाद जी को कहीं न कहीं उस समय निषादों की स्थति अखरती थी। निषाद समाज धीरे-धीरे पतित हो रहा था। जिसे देखकर निर्बल, शोषित और वंचितों के मसीहा कहे जाने वाले महामना डॉ संजय निषाद जी ने अपने वंश औऱ जाति के लिए कुछ करने का पवित्र स्वन देखा। गुजरते वक्त के साथ डॉ संजय निषाद जी की स्कूली शिक्षा भी पूरी होने लगी।
      इन्होने 1988 में में एन.यू. कानपुर विश्वविद्यालय से बी.एम.ई.एच. की उपाधि प्राप्त कर चिकित्सा अभ्यास शुरू किया और 1988 में ही आल इण्डिया ई.एच.पी. गणपरिषद् के संस्थापक राष्ट्रीय महासचिव, 1989 में काउण्ट मैटी मेमोरियल के सचिव, 1990 में डाक्टर मैटी रिसर्च सेन्टर एण्ड चैरिटेबुल इंस्टिच्यूट आफ ई.एच.पी. के निदेशक एवं 2002 में पूर्वांचल मेडिकल कालेज आफ ई.एच.पी. के संस्थापक प्राचार्य, 2003 में आल इण्डिया ई.एच.पी. डाक्टर्स एशोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर होते हुए 2005 में स्वीडिस बोर्ड आफ ई.एच.पी. स्वीडन से पी.जी.डी.एच.पी. की उपाधि प्राप्त किया। इसके बाद 2008 में आल इण्डिया बैकवर्ड एण्ड माईनारटीज वेलफेयर मिशन, शक्ति मुक्ति महासंग्राम के संस्थापना की और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष बने एवं राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद् का संयोजन किया और बाद में 16 अगस्त 2016 को राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद गर्भ से निकली निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल की स्थापना कर इसके संयोजक/राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर रहते हुए पूरे देश में अध्ययन यात्रायें कर मूलवासी निषाद वंश की एकता पर विशेष अध्ययन किया। 2017 विधान सभा के चुनाव में पहली बार में  1 विधानसभा सीट जीतकर अपना खाता खोला और  अपनी पार्टी व समाज का लोहा मनवाया।
    आज निषाद वशंज समाज जोड़ो कैडर कैम्प में जागृति एवं जागरूकता महाजागरण अभियान में सामाजिक, राजनैतिक, व्यवस्था परिवर्तन का लक्ष्य निर्धारित करके संगठन एवं पार्टी द्वारा राष्ट्रव्यापी जन आन्दोलन हेत पूर्व राज्यमंत्री मा. चौधरी लालता प्रसाद निषाद के संरक्षण एवं सहयोग से नेतृत्वहीन निषाद वंश में नेतृत्व निर्माण का कार्य कर रहे हैं।
    आज एक विद्यार्थी जहाँ पढ़ लिखकर अपना और ज्यादा से ज्यादा अपने परिवार का नाम रौशन करने का सपना देखता है, वहीं हमारे महामना डॉ संजय कुमार निषाद जी ने परिवार के साथ-साथ पूरी निषादवंश की 578 जातियों के गौरव का ख्याल रखा उच्च शिक्षा के बड़े आसमान पर एक कदम होने के बावजूद इनका इनका एक कदम हमेशा अपनी जाति की धरती पर रहा है। ऐसे हैं विराट व्यक्तित्व के माननीय महामना डॉ संजय निषाद जी।
     आइये समाज को लेकर इनके उद्देश्यों पर भी एक नजर डालते हैं –----------------------------------------------------- 
     महामना का मानना है कि राजनैतिक पार्टियां एक बस की तरह होती हैं। न तो बस मे बैठने वाले यात्री के अनुसार चलती हैं और न तो ड्राइवर के मन से, बस मालिक जहां चाहेगा वहीं रुकेगी। मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे, परन्तु सभी जानते हैं कि फैसले मा. सोनिया गांधी लेती थीं। इससे सिद्ध होता है कि निर्बल, शोषित और वंचित समाज का कोई भी नेता सपा, बसपा, कांग्रेस तथा भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री बना भी दिया जाये तो इससे शोषित, वंचित समाज और सर्व समाज का कोई भला नहीं होने वाला है।
    संवैधानिक अधिकारों से शोषित, वंचित समाज, जो अनुसूचित जाति की संविधान की सूची में दर्ज तो है, किन्तु इनकी तमाम पर्यायवाची जातियों को आज तक अनु. जाति का प्रमाण पत्र जारी न होने के कारण आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है।
   उप-जाति, कुरी, गौत्र के आधार पर समुदाय का विखंडित हो रहा है, फलतः समुदाय के सामाजिक, धार्मिक आर्थिक एवं राजनैतिक मान-मर्यादा में हिरास हो रहा है। इसी वैचारिक भिन्नता का उन्मूलन एवं उप-जाति, कुरी, गौत्र के आधार सामाजिक विखराव को रोकने हेतु एक प्रयास किया जा रहा है। इसके माध्यम से हम अपने समुदाय के सभी सदस्यों को भाषा, क्षेत्र, उप-जाति, कुरी, गौत्र जैसे भेदभाव मिटाकर आपसी एकता को मजबूत करने का अनुरोध करते हैं।
    उपरोक्त सभी जातियों के साथ अन्याय और अत्याचार का केवल एक कारण है कि शोषित, वंचित समाज की बिखरी हुई आवाजों का कोई मोल नहीं है। इनकी कोई राजनैतिक पार्टी नहीं थी। शासन सत्ता व आरक्षण में इनकी भगीदारी सुनिश्चित कराने हेतु समस्त वंचित उपेक्षित, शोषित, दलित, पिछड़े, अत्पसंख्यक समूहों एवं विशेषकर मछुआ समुदाय से अपील करते हैं कि लाखों, करोड़ो की तादात में विशाल कार्यकर्ता तैयारकर संघर्ष के लिए हुंकार भरें और आने वाले दिनों में “निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल” को सत्ता में पहुचाने का संकल्प लें।
   ऐसे बुलंद इरादों के साथ पार्टी कि नाव और शोषित , वंचित समाज को चला रहे हैं महामना डॉ संजय कुमार  निषाद जी नेतृत्वहीन निषाद वंश के उत्थान के लिए आगे आने वाली इस महान हस्ती को दिल से नमन, जिसने निषाद राजा जरासंध, निषाद राजा धुर्वे, रानी रासमणि धींवर, रानी दुर्गावती, रानी अवंति बाई, बाबा कालू कहार, महर्षि वाल्मीकि, महाराजा सिंहानु निषाद , महाराजा पृथु निषाद, महाराजा वेन निषाद, निषाद राजा हिरण्यकशिपु, निषाद राजा एकलव्य, महाराज गुह्यराज निषाद, रानी सत्यवती, योगी मछेन्द्रनाथ, महर्षि कश्यप, निषाद महर्षि वेदव्यास, महाराजा नल निषाद, महाराजा बलि निषाद, अमर शहीद जुब्बा साहनी, बिरसा मुंडा, टट्या भील, भीमा भोई जैसी दिव्य आत्माओं के गौरवशाली इतिहास को सहेजने एवं गोत्रों के आधार पर फैले समस्त वंचित समाज को एक माला के रूप में पिरोने का अदभुत कार्य किया है।

  इसलिए चलो लखनऊ
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तीन दिवसीय 30 नवम्बर, 01 व 02 दिसम्बर को ''प्रादेशिक कार्यालय लखनऊ" में आखिर क्यूं जरूरी है "मझवार आरक्षण" को लेकर आयोजित ऐतिहासिक शिक्षण-प्रशिक्षण कैडर कार्यक्रम में निषाद पार्टी और राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद व समस्त मछुआ समुदाय के अधिक से अधिक लोग इसमें अपनी और अपनी आने वाली पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए जरूर भाग लें, परिशिक्षित कार्यकर्ता ही किसी भी समाज के अधिकार हेतु सार्थक लड़ाई लड़ सकता है।
जय निषाद राज

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