धनतेरस पर कटोरा खरीद लें

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव सन्देश (Eklavya Manav Sandesh) सोशल मीडिया रिपोर्ट, 5 अक्टूबर 2018। *धनतेरस पर कटोरा खरीद लें।
      मोदी सरकार शीघ्र ही देशवासियों को भिखारी बना देगी। अवसर भी है और दस्तूर भी धनतेरस के अवसर पर भविष्य के व्यवसाय के लिए कटोरा खरीद लें। पकौड़ा तलने का व्यवसाय भी अब दुरूह होने वाला है। ठेला, तेल, कड़ाही, बेसन, आलू, प्याज के बेतहाशा बढ़ते दाम पर खरीदने के लिए पूंजी चाहिए, तभी तो पकौड़ा व्यवसाय चलेगा। मोदी देश बेच कर झोला उठा रफूचक्कर होने के फिराक में है। देश को लूटने की आदत से मजबूर मोदी जाते-जाते भारतीय रिजर्व बैंक को भी कंगाल कर देना चाहते हैं, तभी तो सेक्शन 7 का प्रयोग कर रिजर्व बैंक में पड़ा 3.6 लाख करोड़ रुपए भी उन गद्दार उद्योगपतियों को दिलवाना चाहते हैं जो जानबूझकर बैंक का कर्ज वापस नहीं कर रहे हैं। मोदी से गहरी मित्रता का लाभ उठाते हुए यह उद्योगपति आरबीआई के आकस्मिक कोष को भी अपनी अय्याशी के लिए ऋण के रूप में हर हाल में पा लेना चाहते हैं।
    4 फरवरी 2015 को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने प्रधानमंत्री कार्यालय को कुछ बड़े बकायेदारों की सूची सौंप कर इन्हें दिवालिया घोषित करने की मांग की थी। यह सूची संसदीय आकलन समिति के अध्यक्ष डॉ मुरली मनोहर जोशी को भी उपलब्ध कराई गई थी। डॉ मुरली मनोहर जोशी ने प्रधानमंत्री कार्यालय से दो-तीन बार जवाब भी चाहा, परंतु अभी तक जवाब प्रतिक्षित है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने न तो आरबीआई को और न ही डॉ मुरली मनोहर जोशी को जवाब देना उचित समझा। वजह साफ़ थी इस सूची में शामिल लोग चौकीदार के आका लोग थे, जो उनके हर विदेश यात्राओं में साथ होते हैं। यह सब गैर निष्पादित संपत्तियां है। आरबीआई इन्हें निष्पादित करना चाहता था। यह तभी संभव था जब, इन्हें दिवालिया घोषित कर, इनकी संपत्तियां जब्त कर लीं जातीं। यदि यह गद्दार एक बार दिवालिया घोषित हो जाते तब, यह सरकारी सौदे में विचौलिया कैसे बन पाते! शायद यही लालच प्रधानमंत्री कार्यालय को इस सूची की तरफ नजर न डालने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया होगा।
       देश की पावर कंपनियां गले तक ही नहीं अपने शरीर की लंबाई से 2 फीट नीचे तक डूबी हुई है। इनके पास कर्ज का ब्याज चुकाने की भी पूंजी नहीं है। ब्याज चुकाने का दबाव इन पर बराबर बढ़ रहा है। ब्याज न चुका पाने की स्थिति में इन्हें दिवालिया घोषित करने का विकल्प ही बचा है। चूकि यह कंपनियां प्रधानमंत्री के छद्म सुनहरे योजनाओं के फलीभूत की प्रक्रिया में संलग्न हैं, इसलिए दिवालिया न होने देना चौकीदार की मजबूरी है। बैंकों के पास पैसा रह नहीं गया कि, वह इन गद्दार उद्योगपतियों को और कर्ज दे सकें! विमुद्रीकरण ने बैंकों का 9 लाख करोड़ों रुपया डुबा दिया है। इस आशय का आरबीआई ने कई अवसरों पर बयान दिया है। चौकीदार को 2019 की चुनावी वैतरणी पार करने के लिए इन्हीं गद्दार उद्योगपतियों का भरोसा है। और उन्होंने शायद यह शर्त रख दी हो कि जब तक हमें नए कर्ज नहीं मिलेंगे तब तक चुनावी फंड का प्रबंध कर पाना संभव नहीं है। अब चौकीदार के समक्ष एक ही विकल्प था कि रिजर्व बैंक के पास सुरक्षित 3.6 लाख करोड़ आकस्मिक फंड को देश को रसातल मे पहुचाने वाले बकायेदारों को नए कर्ज के रूप में दिलवा दिया जाए।
     देश के सभी संस्थान ध्वस्त हो चुके हैं, चाहे वह प्रवर्तन निदेशालय हो, आयकर हो, सीबीआई हो ,न्यायालय हो, व्यवसाय हो, आरबीआई हो, सभी बदले की भावना से कार्यवाही में संलिप्त हैं। फर्जी आंकड़े जन सामान्य को मूर्ख बना सकते हैं, भ्रमित कर सकते हैं, परंतु जब वास्तविक आवश्यकता होगी, तब पुतले काम नहीं आएंगे। वित्त मंत्री का दावा की जीएसटी से ₹ 1लाख करोड़ का लाभ हुआ है निरा बकवास है। यदि ऐसा होता तो सरकार को आरबीआई में दखलअंदाजी कर मुंह की न खानी पड़ती। देश की आर्थिक स्थिति कंगाल हो गई है। चौकीदार झोला उठाएंगे चल पड़ेंगे। परंतु आप कहां जायेंगे देशवासियों?  आपने अपनी आय विदेशों में जमा तो नहीं कर रखी है कि झोला उठाएंगे चल देंगे। इसलिए भविष्य की चिंता कर धनतेरस के अवसर पर कटोरा खरीद लें, शायद भविष्य में रोजी-रोटी का सहारा बन जाए! आपके चौकीदार ने आपके समस्त आर्थिक स्रोतों से इकट्ठे होने वाले धन का त्रयोदशः सुनिश्चित कर दिया है।
     आरबीआई के अखिल भारतीय रिजर्व बैंक अधिकारी एसोसिएशन की अध्यक्ष चित्रा पतंकर ने अपने पत्र संख्या 2-246 दिनांक 31अक्टूबर 2018 के माध्यम से अपनी चिंता व्यक्त कर दी है कि सरकार हमें मसवरे दे सकती है, परंतु दखलंदाज़ी नहीं कर सकती है। उसकी दखलंदाज़ी देश हित में बिल्कुल नहीं है। इस समय देश किसी युद्ध की विभीषिका से नहीं गुजर रहा है कि, सरकार सेक्शन 7 का प्रयोग करे। इसी पत्र ने विरल आचार्या, उप गवर्नर आरबीआई   सामाजिक तौर पर अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए मजबूर किया।
गौतम राणे सागर,
राष्ट्रीय संयोजक,
संविधान संरक्षण मंच।
(सोशल मीडिया से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है)

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