जानिए क्यों ? योगीजी ने हनुमानजी को दलित बताया है

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh) एकलव्य मानव संदेश (Eklavya MamaM Sandesh) सोशल मीडिया ब्यूरो रिपोर्ट, 3 दिसम्बर 3018। जानिए क्यों ? योगीजी ने हनुमानजी को दलित बताया है। सबसे पहले तो हम सभी को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि कोई भी नेता किसी बात को बोलता है तो उसके पीछे बहुत बड़ा स्वार्थ छुपा हुआ रहता है।
   योगीजी अपने जीवन में पहली बार कोई भाषण नहीं दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश में उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया है तो इससे पहले उन्होंने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कितने पता नहीं कितनी बार भाषण दिए होंगे, लेकिन तब उन्होंने हनुमानजी को कभी दलित नहीं बताया। जबकि उत्तर प्रदेश की राजनीति पूरी तरह जाति आधारित होती है। इसलिए अब हमें इस बात को समझना बहुत जरूरी हो गया है कि योगीजी के सामने अब ऐसी कौनसी मजबूरी आ गयी कि हनुमानजी को दलित बताना पड़ा।
    इसको समझने के लिए हमको यह जानना जरूरी है कि ये सब 2019 लोकसभा चुनावों को जीतने के लिए  किया जा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव मोदीजी को आगे करके लड़ा था और मोदीजी ने सबका साथ सबका विकास के अलावा विदेशों में जमा कालाधन वापसी, भृष्टाचार पर लगाम, हर साल ढ़ाई करोड़ युवाओं को नोकरी, किसानों की आय दुगुनी एवं सबके अच्छे दिन आएंगे के वायदों के साथ चुनाव लड़ा था, लेकिन मोदीजी अपने सभी वायदों पर फैल हो गए। साथ ही नोटबंदी और जी एस टी लागू करने से जनता को बहुत ज्यादा परेशान कर नाराज कर दिया, इसलिए 2019 लोकसभा चुनावों में मोदीजी के नाम पर चुनाव जीतना मुश्किल होता दिखाई देने लगा तो, अयोध्या में राम मंदिर के मामले को बड़े जोर शोर से उछाला गया है। लेकिन अयोध्या में जो अभी नवम्बर के अंतिम सप्ताह में धर्म सभा बुलाई गई थी वो बुरी तरह फैल हो गई। क्योंकि मनुवादियों के बच्चे या तो बड़े बड़े पब्लिक स्कूल व कॉलेजों में व विदेशों में ही पढ़ रहे हैं या कम्पीटिशन की तैयारियों में लगे हुए हैं। इसलिए वे धर्म सभा में नहीं आये और पूरा का पूरा वैश्य समाज भी अपने बिजनेस में व्यस्त रहता है वो अपनी दुकान बंद करके कहीं नहीं जाता है। इसके अलावा बहुत से मनुवादी लोग मन्दिरों के पुजारी बने हुए हैं, वे भी अपनी आमदनी को कम नहीं करना चाहते हैं, इसलिए वे भी नहीं पहुंचे। लेकिन मनुवादियों को भरोसा था कि हर बार की तरह इस बार भी एससी, एसटी, ओबीसी के लाखों बेवकूफ लोगों की भीड़ जरूर अयोध्या पहुंचेगी। लेकिन जिन्हें मनुवादी बेवकूफ समझते थे उन्हें सोशल मीडिया ने काफी समझदार बना दिया है। क्योंकि सोशल मीडिया के माध्यम से बाबा साहेब अंबेडकर के संदेश समाज तक लगातार पहुंचाये जा रहे हैं और बाबा साहेब का स्वयं का संकल्प था कि मैं किसी भी हिंदू देवी देवता अथवा उनके ईश्वर की पूजा नहीं करूंगा। बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के अनुयायी एससी, एसटी, ओबीसी समाज के युवाओं ने भी ठान लिया है कि हम भी बाबा साहेब अंबेडकर का ही अनुसरण करेंगे और भविष्य में कभी भी हिन्दू धर्म के ईश्वर और देवी देवताओं की पूजा नहीं करेंगे और न उनके मंदिर से कोई वास्ता रखेंगे।
     युवाओं के इस संकल्प का इतना जोरदार असर हुआ कि अयोध्या बहुत ही कम लोग पहुंचे जिससे उनकी धर्म सभा पूरी तरह फैल हो गई।
     धर्म सभा फैल होने के बाद मनुवादियों के होश उड़ गए और इन्होंने एक नई रणनीति तैयार कर डाली कि हो सकता है हनुमानजी को दलित बता देने से एससी, एसटी, ओबीसी के लोग जरूर हनुमानजी का अनुसरण करेंगे और सेवक बनकर राम मंदिर के लिए जबरदस्त काम करेंगे तथा मंदिर के लिए मरना भी पड़ा तो सबसे पहले दलित, ओबीसी ही मरेंगे।
     अब आप समझ गये होंगे कि लोकसभा चुनाव जीतने के लिए राम मंदिर याद आया है और मंदिर बनाने के लिए धर्मसभा रखी गई लेकिन एससी, एसटी, ओबीसी के युवाओं के नहीं पहुंचने से धर्म सभा फैल हो गई एवं धर्म सभा फैल होते ही दलितों की याद आ गई और दलितों को मंदिर के लिए बुलाने के षड्यंत्र के तहत हनुमानजी को दलित आदिवासी होने की घोषणा की गई।
     हकीकत यही है वरना उत्तर प्रदेश चुनावों के समय योगीजी ने हनुमानजी को दलित क्यों नहीं बताया ?