आप हनुमान बने रहो, ये आपको दास की तरह ही स्वीकार करेंगे ??

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) एडिटोरियल रिपोर्ट, 6 दिसम्बर 2018। भारत पर विदेशी मूल के आर्यों ने जब कब्जा किया तब यह देश सोने की चिड़िया कहलाता था। भारत की मजबूती निषाद संस्कृति की मजबूत सभ्यता हड़प्पा, मोहन जोदड़ो सभ्यता थी। यह सभ्यता निषाद सभ्यता थी। क्योंकि यह सिंधु नदी घाटी की सभ्यता थी। इस सभ्यता के चर्चे उस समय पूरी दुनिया में थे। इस देश के लोग बड़े दयालु और सभ्य थे। मानवता के पुजारी थे। भारत मे जब भी कोई विदेशी किसी भी नीयत से आया (आक्रमण करके लूटने या शिक्षा ग्रहण करने या इस देस को गुलाम बनाकर अपना राज्य स्थापित करने) यहां के लोगों ने सभी को अपनी संस्कृति के अनुसार अतिथि देवो भव की भावना से प्यार ही दिया। लेकिन दुष्ट आक्रमणकारियों ने भारतीयों की इस मूलभावना का दुरुपयोग ही किया।
   सबसे दुष्ट प्रकृति के लोग आर्य थे, जो तत्कालीन भूमध्यसागर के देश, वर्तमान में इसराइल से भारत में आये थे (यह बात डीएनए टेस्ट में पता चल चुकी है कि भारत की आर्य जातियों के लोगों-बामन, ठाकुर, बनियों का 99 प्रतिशत से ज्यादा डीएनए यहूदियों से मिलता है) ने यहां की संस्कृति को नष्ट किया और मूलवासी भारतीय राजाओं को छल, कपट से मारकर, राक्षस, दानव, के रूप में और अपने आप को देवता के रूप में स्थापित करने के लिए मनुवाद, अवतारवाद का सहारा लिया। और गुलाम बना कर 7000 के लगभग जातियों में विभक्त किया। एक दूसरे को ही ऊंच नीच बनाकर कभी एकजुट नहीं होने दिया। राज्य, धन, शिक्षा से दूर करने के लिए वर्ण व्यवस्था लागू की।
   आर्यों के आगमन के समय भारत को निषाद देश कहा जाता था और यहाँ के निवासियों को निषाद कहा जाता था। उस समय निषाद तीन ग्रुप में एक सुव्यवस्थित तरीक़े से जीवन यापन करते थे। ये थे कोल, किरात, भील।
    कोल ऐसे लोगों को कहा जाता था जो पानी के श्रोतों के
               
ऊपर अपना अधिकार रखते थे और पानी के सहारे ही जैसे नाव खेना, मछली पकड़ना, बालू, मौरंग, खनन, नदी किनारे खेती करना आदि तरीके से अपनी जीविका चलना।
    किरात ऐसे लोगों को कहा जाता था जो नदी किनारे से हटकर खेती, बनवानी, पशुपालन आदि के द्वारा अपना जीवन शुखी जीवन जीते थे।
    भील ऐसे लोगों को कहा जाता था जो पूरी तरह से जंगलों पर निर्भर रह कर जीविकोपार्जन करते थे। जंगली जानवरों का शिकार, जंगली फल, फूल, कन्द मूल इनका भोजन होता था। जंगलों में ही इनका निवास होता था।
   भारत के ये तीनों प्रकार के लोगों में आपस में कोई मन मुटाव या झड़े नहीं होते थे। तीनों तरह के भारत वाशियों में आपस में रोटी बेटी का भी सम्बंध रहता था। इस लिये सभी प्रकार से भारत भूमि धन्यधान से एक मजबूत आर्थिक महा शक्ति के रूप में विख्यात थी। भारत की इसी सम्रद्धि ने हमेशा विदेशियों को ललचाया और आकर्षित किया।
    जब आर्य इस देश में आये तो उनकी संख्या 20 के आसपास ही थी। ये यहां के मजबूत लोगों से सीधे लड़ नहीं सकते थे। इस लिए सबसे पहले इन्होंने भिक्षा मांगने का कार्य किया। और भिक्षा मांगते समय ही ये अपने लालची मकसद को पूरा करने के लिए त्रिवाचा (तीन वचन) का सहारा लेते थे। ये जब भी किसी भारत के मूलवासी से कुछ भी मांगते थे तो उससे त्रिवाचा कराते थे। मूलवासी कभी किसी को अपनी ओर से धोका नहीं देने पर कायम रहते थे और अपने वचन की रक्षा के लिए अपनी जान भी देने के लिए तैयार रहते थे। इसी का लाभ आर्यो ने भारत पर कब्जा करने में लगा दिया। और खुद को धीरे धीरे देवता बनाकर लोगों के दिमाग में बसाते चले गए।
     भारत का जो भी मूलवासी शक्तिशाली होता था और आर्यों की त्रिवाचा में बंधकर अपने ही लोगों के नर संहार में इनका साथ देता था, उसे ये लोग हनुमान की तरह पूजते तो हैं, लेकिन उसको मानव नहीं, एक जानवर की तरह प्रचारित करके पूजते हैं। उसको अगर यह मानव की तरह पूजते तो मूल भारतियों को पता चल जाता और आज के युग में आर्यो के वंशजों को उच्च वर्ग का नहीं मानते। आर्यों के वंसज आज भी मूलवासी भारतीयों को हनुमान की तरह ही अपना गुलाम बनाकर रखना चाहते हैं। उनसे आज भी चाहते हैं कि आप हमारे भक्त हो तो अपना सीना फाड़कर दिखाते रहो। और मनुस्मृति को सर्वश्रेष्ठ विधान मानते रहो।
   भारत जब अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुआ तो इस देश में एक संविधान के माध्यम से मानवतावादी शासन व्यवस्था की स्थापना की गई। इस व्यवस्था को संविधान में समाहित करने का सबसे बड़ा श्रेय भारत रत्न बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर जी को जाता है। आज उनकी 63 वीं पुण्यतिथि पर में यह लेख लिख रहा हूँ। बाबा साहब ने हनुमान नहीं महात्मा बुद्ध के वैज्ञानिक विधान को लागू कराने के लिए कार्य किया, जिसका नतीजा है कि आज भारत के मूलवासी पढ़ लिखकर बराबरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और आगे बड़ते हुये शोषणकरी आर्यों को चुनौती दे रहे हैं।
    भारत पर आज मनुवादी व्यवस्था थोपने के लिए हिन्दू मुस्लिम के बीच खाई पौदा की जा रही है और इस हिन्दू के नाम पर मूलवासियों को हनुमान की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उनको बजरंग दल के रूप में लगाया गया है। बजरंग दल में 90 प्रतिशत से ज्यादा मूलवासी भारतीय ही हैं। जो कभी गाय की रक्षा के नाम पर, कभी राम मंदिर के नाम पर , कभी भोले शंकर, अमरनाथ, केदारनाथ, वैष्णों देवी, भागवत पुराण, राम कथा, देवी जागरण, बनवासी गिरिवासी और न जाने किन किन नामों, कामो के माध्यम से आर्यो की सबसे खतरनाक संस्था आरएसएस मूलवासियों को हनुमान बनाकर अपना हिन्दू राष्ट्र के नाम पर मनु के विधान को लागू करने के लिए लगी हुई है।
      आज भी मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, शरद यादव, मायावती, अखिलेश यादव, डॉ. संजय कुमार निषाद राक्षस के रूप में मनुवादियों को दिखाई देते हैं। नरेंद्र मोदी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, निरंजन ज्योति हनुमान के रूप में इनकी सहायता करते हैं। मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, अखिलेश यादव और मायावती की सरकारों ने मूल भारत वाशियों के साथ सर्व समाज को मजबूत करने के लिए कार्य किये। लेकिन कल्याण सिंह और उमा भारती, की सरकारों ने आरएसएस को भारत की लोकतंत्र पर कब्जा करने के लिए सीढ़ी का और अपने मूलवासी भारतीय समाज को पूछ दिखाने का कार्य किया।
       जब गोरखपुर में निर्बल इंडियान शोषित हमारा आम दल
(निषाद पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामना डॉ. संजय कुमार निषाद ने भारत के असली मालिक निषाद वंस को 5 साल में जागरूक करके आरएसएस के मजबूत नेता योगी आदित्यनाथ नाथ के 29 साल के किले को विपक्ष के मजबूत गांठवंधन के माध्यम से चकना चूर कर दिया तो उसका असर फूलपुर, कैराना, नूरपुर चुनावों में भी हुआ और विपक्ष को 2019 के लिए संदेश दिया कि अगर एक नहीं हुए तो आरएसएस इस देश के मानवतावादी संविधान को खत्म कर मनु के विधान को लागू करने के लिए आगे बढ़ जाएगा। और आपको हनुमान के तरह गुलाम बनकर उनकी सेवा के लिए तैयार रहना होगा।
     आरएसएस के हिन्दू राष्ट्र में आपको अपनी जाति के रूप में ही रहने के लिए मजबूर किया जाएगा। जैसे आज भी राम भक्त हनुमान, महावली हनुमान, महावीर हनुमान, रुद्रावतार हनुमान के नामों से पूजे जाने के बाद भी दलित के रूप में प्रचारित किया जा रहा है भाजपा, आरएसएस की उत्तर प्रदेश की सरकार के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ के द्वारा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविद आज भी मनुवादियों के मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते हैं दलित होने के नाते।
      यह एक सबक ही है मूलवासियों के लिए- कब तक हनुमान बनकर अपने ही लोगों को गुलाम बनवाते रहोगे। सोचो, जागो, एकता के लिए आगे बढ़ने की जरूरत है। मूलवासी जातियों को आपसमें ऊंचनीच के भेद को मिटाने की जरूरत है। आप मूलवासी हो, भारत के असली मालिक हो। आपका डीएनए एक है, यही आपकी एकता का मूलाधार है।
जय निषाद राज
जय भारत।

Comments

  1. These aryan had a conspiracy to rule over Indian origin inhabitants through false magical world

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