निषाद आरक्षण की मांग जायज है, अपना वायदा निभाएं मुख्यमंत्री योगी जी-कुंवर सिंह निषाद

मथुरा, उत्तर प्रदेश (Mathura, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश रिपोर्टर राहुल कश्यप की रिपोर्ट, 30 दिसम्बर 2018। उत्तर प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश महा सचिव श्री कुंवर सिंह निषाद जी का मछुआ आरक्षण के समर्थन में उतरने के लिए निषाद पार्टी तहे दिल से उनका आभार व्यक्त करती है। कुंवर सिंह निषाद ने सोशल मीडिया फ़ेसबुक पर अपनी एक पोस्ट में 7 जून 2015 के मगहर गोरखपुर कांड
(जिसमें वीर शहीद अखिलेश निषाद की पुलिस गोली से निषाद आरक्षण के लिए रेल रोको आंदोलन में मौत हो गई थी) के बाद के आंदोलन की यादें ताज़ा करते हुए तत्कालीन गोरखपुर उस समय के समाचार पत्रों की फोटो और 29 दिसम्बर 2018 के गाजीपुर काण्ड की आज 30 दिसम्बर 2018 के समाचार पत्रों की फोटो को शेयर करते हुए लिखा है कि-
     "ग़ाज़ीपुर में शहीद हुए पुलिस के हेड कांस्टेबल श्री सुरेन्द्र वत्स जी के प्रति हार्दिक संवेदनाएँ प्रकट करता हूँ।
     सामाजिक न्याय के मुद्दे पर निषाद कश्यप समाज की आरक्षण की माँग जायज़ है, स्वंम मुख्यमंत्री जी निषाद कश्यप समाज के आरक्षण के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने अखलेश यादव के ख़िलाफ़ इस आंदोलन को संभाला था, उनको तत्काल अनुसूचित ज़ाती का आरक्षण मिले इसका पुरज़ोर समर्थन करता हूँ - कुंवर सिंह निषाद भाजपा नेता"।

  (जानिये क्यों निकाली जा रही है निषाद एससी आरक्षण जन आक्रोश यात्रा https://youtu.be/OwAlG0fKenA)

       इसका मतलब है कि आज योगी जी निषाद वंशियों से किये अपने वायदे को शायद भूल गए हैं। और इसी लिये गाजीपुर काण्ड के बाद आंदोलनकारियों पर पुलिसिया अत्याचार करा रहे हैं।

(जौनपुर में निषाद आरक्षण के लिए हुए जबरदस्त प्रदर्शन
https://youtu.be/02u9muwgMq8)

       निषाद पार्टी का मानना है कि गोरखपुर कांड का असली गुनहगार खुद भाजपा और उसके मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी हैं। जो निषादों के आरक्षण के लिए लागू 23 दिसम्बर 2016 के तत्कालीन अखिलेश यादव की सपा सरकार के शासनादेश और उसके बाद 29 मार्च 2017 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के ऑर्डर को लागू करने के प्रति गंभीर नहीं हैं।

(फ़िरोज़ाबाद में रेल रोको आंदोलन
https://youtu.be/acEqiqxLR7c)

    पहले राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद और बाद में उसकी बनाई गई निषाद पार्टी लगातार निषाद मछुआरों के मझबार, तुरैहा, गौड़ के परिभाषित आरक्षण के लिए आंदोलन करती रही है। पहले 16 फरवरी 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री का आवास घेरना रहा हो, या गोरखपुर के मगहर का रेल रोको आंदोलन जिसमें इटावा के वीर शहीद अखिलेश सिंह निषाद की जान पुलिस की गोली लगने से गई थी या 27 मार्च 2017 को दिल्ली के जन्तर मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया हो, या गोरखपुर में रेल रोको आंदोलन किया हो या पूरे उत्तर प्रदेश में कई जिलों में रेल रोको आंदोलन किया गया हो या

(मेरठ में निषाद आरक्षण आंदोलन
https://youtu.be/rhDNj3GPdAw)

जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया हो या तहसीलदारों एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया हो या सांसद, विधायकों को ज्ञापन सौंपे गए हों या मुख्य मंत्री, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, राष्ट्रपति या इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन भेजे गए हों, सभी प्रकार के आंदोलन निषाद पार्टी करती रही है। कहीं भी इतने आंदोलन किसी एक संगठन के द्वारा लगातार करने के बाद कभी भी हिंसक आंदोलन निषाद पार्टी ने नहीं किया है। क्योंकि इस पार्टी का बेस गरीब मजदूर जनता है। जो अपने पेट पालन करने के लिए भी परेशान है।

(गोरखपुर निषाद आरक्षण आंदोलन
https://youtu.be/wEGJkfkCyYw)

   निषाद आरक्षण को धोका देने के लिए सरकार पिछड़े वर्ग का वर्गीकरण का शिगूफा जरूर छेड़ती रही है, जो निषादों के आरक्षण का सही समाधान नहीं है। क्योंकि आज निषादों की सभी जातियों के हालात काफी कमजोर हो चुके हैं और उनका रहन सहन के साथ शिक्षा का स्तर अनुसूचित जातियों के मुकाबले काफी नीचे पहुंच गया है।

(कानपुर आंदोलन
https://youtu.be/7KPDtj4D25E)

इसलिए प्रदेश सरकार निर्दोष निषादों का गाजीपुर हिंसा के नाम पर उत्पीड़न न करके उच्च स्तरीय न्यायिक जांच के आदेश दे। क्योंकि ऐसे सबूत मिले हैं कि 29 दिसम्बर का गाजीपुर काण्ड भाजपा के कुछ गुंडों के द्वारा किया गया लगता है। जो केवल निष्पक्ष न्यायिक जांच से पूरा हो सकता है।
(जन्तर मंतर 27 जून 2017 के निषाद आरक्षण आंदोलन
https://youtu.be/Uv1fwlPksD0)

   हम निषाद वंशिय मछुआरा जाती के सभी नेताओं से अनुरोध करते हैं कि आप भी अपनी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भाई कुंवर सिंह निषाद की तरह समाज को संकट की घड़ी में साथ दें। क्योंकि मनुवादी और आरएसएस के मीडिया ग्रुप एक पक्षीय निषाद पार्टी को बदनाम करने की होड़ में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन इसी मीडिया को 6 से 7 लाख की 16 सितम्बर 2016 की रमा बाई अम्बेडकर मैदान की निषाद समुदाय की भीड़ पैसों के लालच में दिखाई नहीं देती है।

(16 सितम्बर 2016 का लखनऊ आंदोलन
https://youtu.be/YuseMyaMxfg)