निषाद वंशियों का उत्थान केवल एससी, एसटी आरक्षण को तत्काल लागू कराने से ही होगा

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) एडिटोरियल रिपोर्ट, 13 दिसम्बर 2018। निषाद वंशियों का उत्थान केवल एससी, एसटी आरक्षण को तत्काल लागू कराने से ही होगा।
      आज इस भारत देश के असली मालिक एकलव्य, गुह्यराज निषाद राज, कालू बाबा धींवर, हिरण्यकश्यप के वंशज (5 जनवरी 2011 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस मार्कण्डेय काटजू और सुधान्द मिश्रा की खंडपीठ के आदेशानुसार, वैदिक एवं ब्राह्मणीय धर्म के लेखक श्रीकांत पाठक जी के अनुसार, जबाहर लाल नेहरु जी की पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया के अनुसार और आज भी अधिकांशतः दूर दराज़ के जंगलों, और नदियों के किनारे निवास करने के साथ शहरों व महा नगरों में झुग्गी झोपड़ी में रहने को मजबूर),
    देश भक्त (स्वतंत्रता संग्राम में कानपुर के शति चौराह घाट पर अपनी रोजी रोटी 167 नावों को गंगा में डुबोकर हज़ारों अंग्रेजों को मारने और फांसी के फंदे पर चढ़े महान नायक समाधान निषाद और लोचन निषाद, शंकर भवानी तोपची, बैरकपुर के जांबाज गंगादीन निषाद, चौरी चौरा के नायकों, महान वीर ऊधम सिंह, जुब्बा साहनी, तिलका मांझी के वंसज) और देश भक्ति के इनाम में अंग्रेज सरकार द्वारा थोपे गये पांच एक्ट- नॉर्थन इंडिया फ़ेरीज़ एक्ट, नॉर्थन इंडिया फिशरीज एक्ट, नॉर्थन इंडिया मीनिंग एक्ट, नॉर्थन इंडिया फॉरेस्ट एक्ट और क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट से उजड़े और विस्थापित जीवन जीने को मजबूर ,
     सभी धर्मों के महापुरुषों के जनक व रक्षक (भगवान राम और उनके चारों भाइयों सहित हनुमान जी को इस धरती पर अवतरित करने वाले महान तपस्वी और महान वैज्ञानिक राम के परम मित्र गुह्यज निषाद राज के चाचा महऋषि शृंगिराज निषाद, महात्मा बुद्ध की माता महा माया और उनकी पालक माता व मौसी महा प्रजापति, योगिराज श्री कृष्ण और उनके भाई बलदाऊ को मथुरा से जरासंध के आक्रमण के बाद जान बचाने के भागने पर द्वारिका में अपनी मित्रता की खातिर शरण देकर द्वारिकाधीश बनाने वाले महान धनुर्धर वीर एकलव्य, ब्राह्मण महऋषि नारद के महान गुरु कालू बाबा धींवर और गोरखनाथ जी के गुरू व दुनिया को अलख निरंजन का संदेश देने वाले महान तपस्वी गुरु मछेन्द्रनाथ, शिख धर्म के दसवें गुरु- गुरु गोविंद सिंह जी के द्वारा हिन्दू धर्म की रक्षा की खातिर स्थापित खालसा पंथ में पंच प्यारों के रुप में अपनी कुर्बानी देने के लिए तैयार हुए महान देश भक्त बाबा हिम्मत सिंह निषाद) के वंसज,
   हमेशा विदेशी आक्रांताओं से सबसे पहले टकराने के साथ उपरोक्त कारणों से सैकड़ो जातियों जैसे धींवर, ढीमर, धीमर, कहार, कश्यप, तुरैहा, गौंड, बेलदार, खरबर, माझी, मझवार, मल्लाह, केवट, बिन्द, रायकवार, रैकवार, भोई, बाथम, धुरिया, गुड़िया, मेहरा, साहनी, चाई, मछुआरा, निषाद आदि में बंटे हुए समाज की हालत आज देश की अन्य अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति से भी बदतर हो गई है। इनके बच्चों से आज महँगी शिक्षा दूर होती जा रही है। जीवन जीने के संसाधनों नाव, घाट, मछली, बालू मोरंग खनन, जंगलों पर सरकार व माफियाओं का कब्जा है। जिससे इनमें बेरोजगारी सबसे ज्यादा है और दयनीय जीवन जीने को मजबूर हो गए हैं।
   यह समाज भारत के हर प्रदेश में एक से लेकर 7 नामों से अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त है। लेकिन एक ही जाती के 4 से 7 तक नाम हैं जैसे कहार, कश्यप, धींवर, धीमर, मछुआरा, के साथ वही व्यक्ति मल्लाह, केवट, बाथम, रायकवार मेहरा या तुरैहा मझबर, गोंड, गोंडिया, बेलदार, खरबार भी है। और यह समाज आजादी से पहले और आज़ादी के बाद से ही अपने विसंगत आरक्षण को परिभाषित करने के लिए मांग करने के साथ आंदोलन भी करता रहा है। यह आंदोलन बाबू जय पाल सिंह कश्यप जी के नेतृत्व में चाहे दिल्ली के वोट क्लब पर किया गया हो या बाबू मनोहर लाल जी के नेतृत्व में लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में 20 जनवरी 1994 को या आज भी लगातार पिछले 5 साल से महामना डॉ. संजय कुमार निषाद जी के कुशल नेतृत्व में पहले राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद और बाद में 16 सितम्बर 2016 को पहले लखनऊ के रमा बाई पार्क में निषाद पार्टी के द्वारा या उससे पहले मुख्यमंत्री आवास लखनऊ को घेरना हुआ हो या 27 मार्च को नई दिल्ली में जन्तर मंतर पर संसद घेरने के लिए विशाल प्रदर्शन किया गया हो या अनेकों बार रेल रोको आंदोलन किया गया हो या 7 जून 2015 को गोरखपुर के मगर में हुए रेल रोको आंदोलन में इटावा का वीर अखिलेश निषाद इसी आरक्षण के लिए राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद की तरफ से शहीद भी हो चुका है और इसी तरह के आंदोलन बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा आदि जगहों पर भी होते रहे हैं और लगातार आरक्षण को लागू कराने के लिए प्रयास करता रहा है।
   उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार ने दिसम्बर 2016 में 17 जातियों को पिछड़ा वर्ग की सूची से काटकर अनुसूचित जाति में शामिल कर दिया था और वह आदेश आज भी लागू है और उस पर 29 मार्च 2017 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रमाण पत्र बनने पर लगी रोक भी हटा रखी है। खुद मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने निषाद आरक्षण के आंदोलन के धरने पर जाकर गोरखपुर में सांसद रहते हुए भाजपा की सरकार बनने पर निषादों को आरक्षण देने की बात कही थी। आज केंद्र और उत्तर प्रदेश व बिहार में भाजपा की सरकारें हैं और अगर ये इस समाज की सच्ची हितैषी हैं तो तुरंत निषाद वंशियों की पुरानी और जायज मांग को लागू करने के लिए कदम उठाने चाहिए। जिससे यह समाज देश की अन्य जातियों के साथ विकास कर सके।
   निषाद वंसज आज पूरे देश में लगभग 25 करोड़ की संख्या में हैं और जिस भी दल के साथ यह जाता है उसी की सरकार बन जाती है। अभी सम्पन्न हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव में भाजपा के द्वारा माझी आरक्षण को नुकसान पहुंचाने का खामियाजा भुगतना पड़ा है और इस समाज का 80 प्रतिशत से ज्यादा वोट कांग्रेस को गया और भाजपा को इन राज्यों से राज गद्दी से उतार ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
     भाजपा की अनुसूचित जाति या जन जाती के आरक्षण के इतर किसी भी चाल का जबरदस्त विरोध करने के लिए सभी निषाद वंशियों को जागरूक करने के लिए अपना योगदान जरूर देना चाहिए। और जो इस मांग के विरोध में या अन्य तरह के आरक्षण के पैरोकार बने हुए हैं उनका वहिष्कार करना चाहिए तभी निषाद वंसाजों को अपना अधिकार प्राप्त हो सकता है।