संस्कार और समय की मांग

नंदुरबार, महाराष्ट्र (Nandurvar, Maharashtra), एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो रिपोर्ट (17 दिसम्बर 2018। 16 दिसंबर, शाम को 6.30 बजे परिवार के साथ बाइक पे कल्याणी Residency, नीझर रोड से आ रहा था. 200 मिटर दूरी पे एक लगभग 55 साल का आदमी मोटर सायकल पे जा रहा था और अचानक उसकी बाइक स्लिप होगई और बहुत बुरी तरह से बाइक से रोड पे गिरा और बाइक साइड में घिसटती हुई चली गई. सिर पे बहुत भारी चोट लगी और काफी खून बहने लगा और वह आदमी बीच सड़क पे खून से लतपत पड़ा रहा. मैने तुरन्त उसके पास मेरी बाइक रोकी और परिवार को साइड में रुकने को कहा. डर रहा था खुन देखकर कही दोनों छोटी बच्ची (परी और मिशिका) कही घबरा न जाये. मेरी पत्नी  जल्दी से गाड़ी से उतरकर उन दोनों लड़कियों को घटना स्थल से थोड़ा आगे लेके चली गई. मैं उस आदमी के पास गया और उससे बात करने लगा लेकिन वो कोई रीस्पॉन्स नही कर रहा था और सिर बुरी तरह फट चुका था. इस एक मिनट के अन्तर मे और 4-5 बाइकर्स रुके. उसमें से एक को बोला इनका मोबाइल ढूंढो यही कही होगा क्यो की मै जेब चेक कर चुका था मोबाइल कही नही था और वो कुछ भी बोल नही रहा था. उतने में मुझे याद आया मेरे एक मित्र दीपक भाई जो पोलिस में काम करते है उन्होंने कल ही एक मोबाइल नंबर पब्लिक सेवा हेतु शेयर किया था. अच्छा हुआ वो नंबर मैंने सेव कर लिया था. याद आया और उस नंबर पे फोन कर दिया. उन्होंने लोकेशन समझ के तुरंत मदत पहुचाते है ऐसा बोला. तबतक यहां काफी लोग इकट्ठा होगये और ट्रैफिक भी सारा रुक गया. इस बीच एक आदमी ने 108 पे काल करके एम्बुलेंस को बुलाया. मैंने उसकी छाती पे हाथ रखकर चेक किया तो सांसे चल रही थी पर वो बेहोश हो चुक था पर खून बहता ही जा रहा था. मैंने एक कार वाले को बिनती की कि उसको अपने कार में डाल लो भाई पर उसने घबराकर मना कर दिया. थोड़ी ही देर में एक आदमी को मोबाइल थोड़ी दूर पड़ा हुआ मिल गया और उसने मेरे पास दे दिया. मै जब तक पुलिस या एम्बुलेंस आती तब तक उस मोबाइल के नंबर डायल करने की कोशिश कर रहा था. पर रेंज की वजह से कॉल लग नही पा रहा था. घटना से 10 मिनट के अन्दर पुलिस की गाड़ी आई. मैंने उनसे आग्रह किया कि एम्बुलैंस का इंतजार न करे तो अच्छा होगा. उन्होंने भी उस आदमी की हालत देखकर तुरंत हा भर दिया. मैने पास खड़े लोगो को बोला कि इनको उठाओ और गाड़ी में डालो लेकिन मैंने देखा कि कोई नही आ रहा था उठाने को. वो लोग डर रहे थे फिर मैंने उनको विश्वास देकर कहा कुछ नही होगा घबराओ मत तब 4 लोगो ने साथ दिया और उस आदमी को पोलिस की गाड़ी में बीच की सीट पे लेटाया. सिर से खून बह रहा था इसलिए तब तक एक पुलिस वाले ने उसके सिर पर रुमाल बांध दिया. मैने वो मोबाइल पुलिस को दिया और बोला इनकी बाइक उपनगर पुलिस स्टेशन पहुचाता हु. उस पुलिस वाले ने हा भरी औऱ जल्दी से गाड़ी लेके निकल गया. मैंने लोगो से अपील की जो लोग डबल सीट हो वो बाइक को पुलिस स्टेशन पहुचाने को कहा तो एक लड़का बोला हम पहुँचा देते है सर. मैंने थोड़ी चैन की सांस ली और ट्रैफिक हटाने में जुट गया. कई लोगो ने मेरा 'बहुत बढ़िया काम किया आपने' कहकर मेरा हौसला बढ़ाया. तब अचानक याद आया कि परिवार तो आगे कही खडा होगा. तुरन्त मेरी बाइक लेके आगे गया तो पत्नी और दोनों बच्चीया कोने में चुपचाप सहमी हुई सी खड़ी थी. वो एक भी शब्द बोले नही और तीनों बाइक पर बैठ गए. मैं बाइक चलाते हुवे उनकी घबराहट महसूस कर रहा था और मन ही मन उस आदमी की बचने की दुआ भगवान से मांग रहा था. थोडी देर बाद घर पहुच के सोचने लगा कि यह सब अपने आप कैसे हुआ? तो जवाब आया यह सब संस्कारों की वजह से हुआ।
गिरिश सुखलाल बड़गुजर, नंदुरबार

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