पूर्व सांसद स्व.जय पाल सिंह जी की पुण्यतिथि पर एकलव्य मानव संदेश की भावभीनी श्रद्धांजलि

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh),  एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) ब्यूरो रिपोर्ट, 8 दिसम्बर 2018।
जयपाल कश्यप जी की पुण्यतिथि 08 दिसम्बर पर एकलव्य मानव संदेश परिवार नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है !! 
       निषाद वंस में जन्मे महान विभूति जयपाल कश्यप जी की पुण्यतिथि पर कश्यप, निषाद, बिन्द आदि जातियों के लिए आज इनकी इनकी वैचारिक प्रासंगिगता बढ़ जाती है I आखिर वो इस पिछड़े समाज के लिए क्या देख रहे थे? वो कौन सी परिस्थिति हो सकती थी जो कि इन वर्गों के लोगो के जीवन में परिवर्तन ला सके ? और आने वाला भविष्य अपना जीवन सही प्रकार से जी सके I
     बाबू जयपाल सिंह कश्यप जी ने जो अलख उस समय जगाया था वो आज भी दीप्तिमान है। मगर उनके जाने के इतने सालों बाद भी उनके सपने आज भी अधूरे हैं I 
    बाबू जयपाल सिंह कश्यप सामाजिक परिवर्तन के प्रणेता और दूरद्रष्टा थे। वे समाज निर्माण कि प्रक्रिया और सामाजिक उत्थान को भली-भांति समझते थे I उनके साथ चलने वाले कहते हैं कि उन्होंने जयपाल जी का जनसैलाब देखा है; सांसद, विधायक, नेता-(वेता) तो बहुत हुए मगर सामाजिक पकड़ और समझ जयपाल जैसी नहीं हुई जिसकी कमी आज उस पूरे आंदोलन में दिखाई पड़ती है I आज सामाजिक आंदोलन एक सौदेबाजी कि तरह है, इन आंदोलनों में सामाजिक शिक्षा नहीं, आंदोलन की कोई समझ नहीं, 'एक आंदोलन चलाओ-किसी पार्टी से टिकट पाओ', 'समाज का नाम लो और स्वहित सरवोपारी हो', इत्यादि जैसी बुराइयों के रहते कहाँ से आ पायेगी जयपाल सिंह कश्यप जी की समझ I ये जो चल रहा है वो समाज के साथ बेईमानी है I
   जयपाल सिंह कश्यप जी ने अपने जीवन में महत्वपूर्ण आंदोलनों का आगाज़ किया, जो उनके पूरे जीवन में दिखाई देता है I रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया (अम्बेडकरवादी), जिसको उन्होंने बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण के बाद संचालित किया, जिसमें दलितों-पिछड़ों-मज़लूमों की लड़ाई लड़ी; इसके बाद बिहार के लेनिन बाबू जगदेव कुशवाहा व महामानव रामस्वरूप वर्मा जी के साथ मिलकर शोषित समाज दाल का निर्माण किया और बिहार प्रान्त में पहला पिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री श्री बिंदेश्वरी मंडल को बनाया I अपने संघर्षो को आगे बढ़ाते हुए वो आल इंडिया मुस्लिम मज़लिस पार्टी के अध्यक्ष बने, जिसका कि बाद में समाजवादी पार्टी में विलय हुआ I चौधरी चरण सिंह जी के नेतृत्व वाली जनता पार्टी (सेक्युलर) से उ.प्र. के आवला लोकसभा सीट से विजयी होकर संसद पहुँचे।
     जयपाल कश्यप जी केवक एक अच्छे नेता ही नहीं बल्कि एक राजनैतिक विश्लेषक भी थे। उन्होंने एशिया में साम्राज्यवाद के दुष्परिणामों के बारे में अपनी पुस्तक 'साम्राज्यवादी शिकंजे में एशिया' में लिखा। अंतर्राष्ट्रीय जानकारी के अलावा बाबू जयपाल जी क्षेत्रीय समस्याओ पर भी अपनी पैनी नज़र रखते थे, जिसका सटीक उदहारण उनकी पुस्तक- 'उत्तर प्रदेश गाँव समाज मैन्युअल' में मिलता है।
बाबू जयपाल कश्यप दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, मज़दूरों, किसानों सहित समाज के तमाम अति-पिछड़े वर्ग- निषाद, मल्लाह, कश्यप, धीवर, बिन्द, केवट, गोण्ड, कहार व इस समाज की तमाम उपजातियों की आवाज़ बुलंद करते रहे। लाठी चलना, तलवारबाज़ी, भालाफेंक, कुश्ती व कबड्डी जयपाल कश्यप के लिए प्रिय खेल हुआ करते थे।
    बाबू जयपाल सिंह कश्यप सड़क के संघर्षों से होकर संसद तक पहुँचे। आज भी इनके संघर्ष सिद्दत से याद किये जाते हैं और आगे भी याद किये जाते रहेंगे। हम अपने पूर्वजों को इसलिए याद करते हैं कि उनके संघर्षों से जुड़ सकें और उस परंपरा को आगे बढ़ा सकें, जो लड़ाई उन्होंने पाखंड के खिलाफ लड़ी थी और समाज को नई राह दिखा सके।        बाबू जयपाल सिंह कश्यप आज भी हमारे दिलों में ज़िन्दा हैं। आओ बाबू जयपाल सिंह कश्यप जी को याद करते हुए सच्ची श्रद्धांजलि दें। बाबू जयपाल सिंह कश्यप के संघर्षों को सलाम।

Comments

  1. बहुत ही सुंदर लेख।।ऐसे महान पुरूष को कोटि कोटि नमन

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  2. Jaipal Singh kashyap amar rahey.

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