निषाद आरक्षण के हीरो अर्जुन सिंह कश्यप का जेल जाना 2019 में डुबोएगा भाजपा की नैया

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh), एडिटोरियल रिपोर्ट, 7 जनवरी 2019।निषाद आरक्षण के हीरो अर्जुन सिंह कश्यप का जेल जाना 2019 में डुबोएगा भाजपा की नैया। निषाद पार्टी के मजबूत स्तम्भ और प्रदेश महा सचिव श्री अर्जुन सिंह कश्यप जी का जेल जाना इस बात को साबित करता है योगी आदित्यनाथ सरकार निषादों के आरक्षण देने के अपने वायदे की जगह निषादों को जेल देने के लिए ज्यादा जागरूक है। तभी तो एक कॉन्स्टेबल की दुर्घटनावस हुई मौत को मॉब लीचिंग बताकर पिछले 10 दिन से गाजीपुर के निषादों के 20 से ज्यादा गांवों में पुलिस द्वारा, बुज़ुर्गों, महिलाओं और बच्चों का जो उत्पीड़न किया गया है उसकी दास्तां सुनकर रेंगटे खड़े हो जाते हैं। हम कॉन्स्टेबल की हत्या का समर्थन नहीं करते हैं। हम उच्च स्तरीय जांच के बाद ही कार्यवाही की मांग सरकार से करते हैं।
निषादों को आज जो आरक्षण लागू कराने के लिए आंदोलन किया जा रहा था उसके खल नायक खुद योगी आदित्यनाथ जी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ही हैं। जो समय समय और निषादों के आरक्षण की मांग का समर्थन करते रहे हैं।

          (घटना की जानकारी के लिए, वीडियो को नीचे दी गई लिंक को किलिक करके एक बार जरूर देखें
                 https://youtu.be/RLEwl8r5kbo)

 और आज जब निषाद लगातार सड़कों पर उतर कर अपना हक मांग रहा है तो, बदले में जेल और प्रताड़ना मिल रही है। आज भाजपा अपनी करतूतों से बर्बादी के कगार पर खड़ी है । योगी सरकार ने अपने हाथो से अपनी सरकार  का क़ब्र खोद ली है। इतिहास गवाह है कि जिस-जिस पार्टी की सरकार ने मछुआ समुदाय के नेताओं को  जेल की सलाखों में बंद किया वो पार्टी आज भी सजा भोग रही है। बसपा के शासन काल में निर्दोष स्व. जमुना निषाद जी को बंद किया गया, आज वही बसपा जमीन पर रेंग रही है। पिछले 2014 के लोक सभा चुनाव में खाता भी नहीं खोल पाई। 2015 में सपा सरकार ने निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामना मा. डा. संजय कुमार निषाद जी को जेल की सलाखों में भेजा, तो लोक सभा व विधान सभा में मछुआ समुदाय ने उस पार्टी को नेश्तानाबूत कर दिया।
निषादों के आरक्षण को लागू न करने की जगह आंदोलन को अपने गुंडो के बल पर बदनाम करने के लिए कोशिश में लगी भाजपा की योगी सरकार की बारी अब 20J719 में है। मछुुुआ समुदाय अब भाजपा की निषाद आरक्षण विरोधी मानसिकता को समझ गया है।
आज 7 जनवरी को सवर्णों को 8 लाख तक की आय को गरीबी मानकर 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा केंद्र की मोदी सरकार ने की है, जनकी सवर्णों के कितनी ऐसी आवादी है जो वास्तव में गरीब है, ये अभी तक किसी भी आंकड़ों में दर्ज ही नहीं है। और निषाद वंश की 90 प्रतिशत आवादी ही गरीबी की रेखा के यातो नीचे या या फिर उसके के करीब ही है, और उसके मिले हुए संवैधानिक आरक्षण को लागू करने के लिए समय नहीं है, आंदोलन करने वालों को जेल भेजकर डराने के लिए समय है।