गाजीपुर में योगी सरकार का निषादों पर पुलिसिया तांडव

गाजीपुर, उत्तर प्रदेश (Gazipur, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh) रिपोर्टर दुर्गविजय सहानी की रिपोर्ट, 1 जनवरी 2018। गाजीपुर में योगी सरकार का निषादों पर पुलिसिया तांडव। सूत्रों से जानकारी मिली है उत्तर प्रदेश पुलिस निषादों के 7 से 8 गाँव में अपना कहर बरपा रही। पुलिस के डर के कारण गांव से अधिकांश पुरूष और बच्चे गायब हैं। पुलिस घरों में तलासी के नाम पर तोड़ फोड़ के साथ लूट पाट भी कर रही है। महिलाओं और छोटे छोटे बच्चों के साथ भी मार पीट की खबर मिल रही हैं। लोगों में भारी दहसत है। ऐसा अत्याचार पहले अंग्रेजी शासन में सुना था। उसी तरह का क्रूर अत्यचार आज आज़ाद भारत में अपनी संवैधानिक मांगों के लिए आंदोलन करेंने वालों के साथ योगी आदित्यनाथ नाथ की सरकार कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य दोषी अगर कोई है तो वह खुद उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री आदित्यनाथ और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं। जिन्होंने निषादों के आरक्षण की बात सार्वजनिक कही थी और आज केंद्र की सड़े चार साल की मोदी सरकार और पौने दो साल की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इसके लिए एक भी कदम नहीं उठाया है।
हम सभी प्रकार की हिंसा के खिलाफ हैं, कॉन्स्टेबल की 29 दिसम्बर 2018 को हुई मौत एक हादसा थी। इस बात के पक्के सबूत सामने आ चुके हैं। और अपनी ना कामयाबी को छुपाने के लिए योगी आदित्यनाथ जी किसी भी हद तक जा सकते हैं, यह इस हत्याकांड के बाद गाजीपुर में पिछले3 दिन से हो रहे पुलिसिया कहर से पता चलता है। 29 दिसम्बर के धरने पर पत्थर वाज़ी भाजपा के कार्यकर्ताओं ने आंदोलन रात निषादों के आगे से (पुलिस की साइड) और पीछे (पुलिस के सामने) खुद की है ऐसे बहुत से वीडियो आज उपलब्ध हैं और अगर निषाद समाज के लोगों ने पुलिस पर पत्थर वाज़ी की थी तो भाजपा के लोग वहां जाकर किसकी इज़ाज़त से पत्थर चला रहे थे। कॉन्स्टेबल की हत्या की गई है या अचानक गिरने से मौत हुई है, इसका खुलासा करने के लिए पहले उच्च स्तरीय जांच की जानी जरूरी है। इस तरह से निषादों को अधिकार देने की जगह अपनी नाकामयाबी को छिपाने के लिए निषादों पर योगी सरकार के अत्याचार, एक सोची समझी नीत का हिस्सा हो सकती है। 
         पूर्व सेंट्रल कस्टम एंड एक्ससाइज इंसपेक्टर एडवोकेट पूजा राम वर्मा के अनुसार गाजीपुर ज़िले में हुई कांस्टेबल की हत्या को बिना किसी सबूत, तथ्य व सत्य के जाने मीडिया द्वारा "निषाद पार्टी" के आरक्षण अधिकार आंदोलन में सक्रिय कार्यकर्ताओं से जोड़कर पेश किया जा रहा है। साथ योगी सरकार भी दुश्मनो की तरह निषाद समाज का दमन करने सक्रिय हो गयी है। खबर है कि 20 से 30 निषादों को उठाकर ले जाकर पुलिस ने टॉर्चर करते हुए जेल भेज दिया है। ज्ञात हो कि काफी लंबे समय से निषाद वंशज अपने संवैधानिक अधिकार के तहत मिले हुए आरक्षण को लेने के लिए आंदोलित है।
जाने कितनी बार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, जिलाधिकारियों, तहसीलदारों को धरना प्रदर्शन के साथ ज्ञापन दे चुके हैं कि संविधान से मिला मंझबार, तुरैहा, गौंड का आरक्षण लागू किया जाए। लेकिन योगी ने निषादों से दुश्मनी निभाते हुए आज तक कोई कार्यबाही नहीं की। योगी की दमनकारी मानसिकता को बदलने के लिए निषाद समाज निवेदन की मुद्रा में समवैधानिक तरीके से आरक्षण पाने के लिए पूरे प्रदेश में आंदोलनरत है। लेकिन आंदोलन के बढ़ते स्वरूप को देखकर मोदी, योगी और अमितशाह को यह डर लगने लगा है कि निषाद समाज का बड़ा वोट बैंक उनके हाथ से निकलता जा रहा है। बीजेपी की यह चिंता मोदी, योगी और अमित के बयानों से क़ई बार उजागर हो चुकी है। निषाद समाज की एकता से घबरा गई है बीजेपी।
2019 के लोकसभा चुनाव के मुद्दे नज़र, बीजेपी ने क़ई दलाल नकली निषाद नेता बनांकर निषाद समाज की एकता को तोड़ने के लिए सक्रिय कर रखे हैं। हो सकता है उसी षड्यंत्र का शिकार हुआ हो कांस्टेबल। ऐसी विषम परिस्थिति में निशादवंशजो, बड़ी सावधानी से काम लेना होगा और योगी के दमनकारी षड्यंत्र का डटकर, जमकर मुकाबला करने के लिए अटूट एकता का परिचय देना होगा। योगी सरकार द्वारा बिना किसी जांच के उठाये गए निषाद युवाओ को छुड़ाने के लिए एक स्वर में आवाज़ उठानी चाहिए। सभी निशादवंशिय नेता, बद्धिजीवी, समाजसेवी और सक्रिय कार्यकताओं से निवेदन है कि हर तरह का मतभेद भूलकर एक स्वर निषादों पर किये जा रहे अत्याचार का विरोध करे और मांग करें कि गिरफ्तार किए निरपराध निषाद युवाओं को रिहा करे योगी सरकार और मझबार आरक्षण पर लगाई अघोषित आपातकाल खत्म किया जाय। योगी के अत्याचारों से बचने व अपने समवैधानिक अधिकार को लेने के लिए निशादवंशजो की एकता की महती जरूरत है।
     गाजीपुर के निषाद गावों में योगी पुलिस का तांडव जारी है। निर्दोष को सजा देना योगी सरकार में कोई नही बात नहीं है। भाजपा  के कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए निषादों पर क़हर बरसा रही है योगी पुलिस।
      गाजीपुर के आठवां मोड़ जाम के दौरान निषाद पार्टी के कार्यकर्ता आरक्षण की मांग के साथ अपने कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग कर रहे थे। जिसमें जाम हटाने के लिए पुलिस ने निवेदन किया, तब भी निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओ ने जाम नहीं हटाया। अगर मौके पर एसपी साहब या डीएम साहब मौके पर आकर बात करते तो सायद उनकी बात मान जाते। लेकिन मौके पर एसपी साहब व डीएम साहब को नहीं आने की कीमत एक पुलिस कांस्टेबल को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। ऐसा ही जाम 7 जून 2018 को निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गाजीपुर में फूलन पुर फाटक के पास रेल रोको आंदोलन के तहत किया था। जिसमें एसडीएम साहब के आने पर निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनकी बात मानकर जाम खोल दिया। अटवां मोड़ पर जाम के दौरान एसपी साहब या डीएम साहब मौके पर मौजूद क्यों नहीं हुए। क्या उन्हें इस जाम की जानकारी नहीं हुई।