हमारा अधिकार तभी सुरक्षित होगा, जब हम मूलनिवासियों की सरकार होगी

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), 12 जनवरी 2019। 10% सवर्णों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए केबिनेट से प्रस्ताव मंजूर कर संसद में भेजा गया, संसद के दोनों सदनों द्वारा आसानी से केवल एक एक दिन की कार्यवाही के द्वारा पास कर दिया और अब सर्वोच्च न्यायालय भी इसको स्वीकृति दे देगा। यह तथ्य स्पष्ट रूप से प्रमाणित करता है कि कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका, सरकार के तीनों अंगों में विदेशी आर्यों का कब्जा है। ये सभी अंग सवर्णों के हितों के लिए कुछ भी कर सकते हैं, किन्तु एस.सी., एस.टी., ओबीसी के हित की जब भी बात होती है तो ये कदम-कदम पर अड़ंगा लगाते हैं।
     1931 की जनगणना के अनुसार 52% ओबीसी के लिए  52% आरक्षण की बात आयी थी तो, सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए मात्र 27% आरक्षण दिया था कि  50% से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता है। किन्तु अब सवर्णों के आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात है तो, सुप्रीम कोर्ट 50% आरक्षण की सीमा रेखा तोड़ सकता है, क्योंकि यह सवर्ण हित की बात होगी। नियम सिर्फ और सिर्फ एस.सी., एस.टी., ओबीसी के लिए ही होता है। सवर्णों के हित के लिए सारे नियमों को बदला जा सकता है।
निषाद आरक्षण को लागू कराने के लिए कई दसकों से पूरे देश में निषाद आंदोलन होते रहे हैं। उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड में बड़े आंदोलन हुए हैं और आज भी जारी हैं, लेकिन किसी भी सरकार ने इसके लिए आक तक गंभीरता नहीं दिखाई है।
   हमारा अधिकार तभी सुरक्षित होगा, जब हम मूलनिवासियों की सरकार होगी।

Comments

हमारे प्रयास को अपना योगदान देकर और मजबूत करें

हमरी एंड्रॉइड ऐप मुफ्त में डाउनलोड करें

हमारे चैनल की मुफ्त में सदस्यता लें

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें

निषाद पार्टी न्यूज़

न्यूज़ वीडियो

निषाद इतिहास