निषाद पार्टी के मजबूत नेतृत्व के संघर्षों का परिणाम है 24 जून 2019 का शासनादेश

लखनऊ, उत्तर प्रदेश (Lucknow, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश (Eklavya Manav Sandesh), ब्यूरो रिपोर्ट, 4 जुलाई 2019। निषाद पार्टी के मजबूत नेतृत्व के संघर्षों का परिणाम है 24 जून 2019 का शासनादेश।
आप सबको मालूम है कि निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामना डॉ. संजय कुमार निषाद के नेतृत्व में 1 फरवरी 2014 से 11 फरवरी 2014 तक जिलाधिकारी गोरखपुर के सामने क्रमिक अनशन, धरना-प्रदर्शन, लाखों लोगों के साथ 17 फरवरी 2014 को मुख्यमंत्री आवास लखनऊ धरना प्रदर्शन, लाठीचार्ज, 7 जून 2015 रेल ट्रेक आंदोलन, कसरवल कांड, शहीद अखिलेश निषाद एवं 37 लोगों सहित डॉक्टर संजय कुमार को धारा 302 में अपराधी घोषित, लगभग 7 लाख लोगों के साथ रमादेवी पार्क लखनऊ में प्रादेशिक आरक्षण आंदोलन, धरना-प्रदर्शन में निषाद पार्टी की घोषणा, 2017 विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा, 60 सीटों पर चुनाव लड़कर 6.5 लाख वोट प्राप्त कर एक विधायक विधानसभा में पहुंचाना, हजारों लोगों के साथ 29 मार्च 2017 को प्रधानमंत्री का घेराव करने हेतु जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन, 2018 के उपचुनाव गोरखपुर से इंजीनियर प्रवीण कुमार निषाद जी को लोकसभा में भेजकर मझवार के प्रयायवाची जातियों पर आवाज उठवाना, 7 मार्च 2019 को मुख्यमंत्री आवास गोरखपुर का घेराव लाठीचार्ज, 29 नवम्बर 2019 को प्रधानमंत्री का घेराव, गाजीपुर आठवां मोड़ घटना में धारा 302 अपराध में 80 निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज, अनवरत प्रत्येक जिलों में रेल ट्रैक आंदोलन, सड़क आंदोलन, धरना प्रदर्शन, सभी तहसीलों में ज्ञापन सभी जिलाधिकारियों को ज्ञापन, पुतला दहन, विरोध धरना, प्रदर्शन जिलेवार विशाल रैलीयां, पुनः 2019 के चुनाव में संत कबीर नगर से इंजीनियर प्रवीण कुमार निषाद एमपी बनाकर, सदन में आपके यहां किससे एवं संविधान में लिखे हुए अधिकारों की आवाज उठाने के लिए लोकसभा में भेजना, अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित का प्रमाण पत्र निर्गत कराने हेतु माननीय ईं. प्रवीण कुमार निषाद जी द्वारा 30 मई 2019 को मुख्यमंत्री को आवेदन देकर 21/12/2016, 22/12/2016 और 30/12/2016 की आदेशों का अनुपालन करा कर 24/6/2019 का शासनादेश आपके सामने परिणाम के रूप में है। उपरोक्त संघर्षों का परिणाम रहा है कि 24/1/2017 का हाईकोर्ट का स्टेट ऑर्डर 3 दिन बाद ही 27/1/2017 को जिलाधिकारी के यहां पहुंचा था, लेकिन 29/3/2017 का हाईकोर्ट का ऑर्डर सचिवालय के न्याय विभाग में अन्याय के रूप में 2 साल 3 महीने धूल चाट रहा था। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय कुमार निषाद के राजनीतिक रणनीति का परिणाम रहा कि 2019 चुनाव होने के एक महीने बाद बाद ही अति पिछड़ी जातियों के लिए अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र जारी करने का सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित कराना आपके संघर्षों का परिणाम है। निषाद पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच वे समझौते का पहला परिणाम है। आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार के तरफ संघर्ष का रुख करने में आपका प्यार, स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद जनसमर्थन, तन, मन, धन का सहयोग मिलता रहेगा।
     आप सबको जानकारी होने चाहिए कि योगी जी की भाजपा सरकार ने आरक्षण जो लागू  किया है, वह केवल हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में लागू किया है। इसीलिए किसी के विरोध करने से उस पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। अभी शासन के nic.com में कुछ समस्याएं हैं इसलिए नेट पर दिख नहीं रहा है, कुछ दिन बाद दिखाई देगा। सभी जिलाधिकारीयों के पास ईमेल पर 24/12/2019 का शासनादेश चला गया है। आप लोग जिलाधिकारी के पास जाकर 24/12/2019 की कापी के साथ 21/12/2016 व 22/12/2016 के शासनादेश एवं 31/12/2016 अधिसूचना और 29/3/2016 के हाईकोर्ट के आदेश की कापी संलग्न कर शासनादेश के अनुपालन में तहसीलदारों को निर्देशित कराने का आवेदन कर तहसीलों में जिलाधिकारी के माध्यम से आदेशों की प्रति तत्त्काल उपलब्ध कराएं। तत्पश्चात अपनी जाति प्रमाण पत्र बनवाने का आवेदन दीजिए। फालतू बहस करने के बजाय अपना और अपने परिवार का आवेदन पत्र तहसील कलेक्ट्रेट में प्रस्तुत करें। जहां से आपको जाति प्रमाण पत्र बन जाएगा। इसी प्रकार 2005 में जिनके भी प्रमाणपत्र बनें थे वह आज भी वैध है और लोग नौकरी में कार्यरत हैं। भले ही मायावती ने शासनादेश निरस्त कर दिया था।
       इस पर नेगेटिव राजनीति ना करें आप से अच्छा तो मायावती के सपोर्टर हैं, कम से कम उसकी बात पर मर मिटते और आप लोग अपने नेता निषाद समाज के मसीहा को गाली बक रहे हैं।
      सभी निषाद समाज के भाइयों से निवेदन है कि हमें डॉ. संजय निषाद जी को मजबूत कर, निषाद समाज को मजबूत कर, अपने संवैधानिक हक़ को प्राप्त करना चाहिए।

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