अलीगढ़, उत्तर प्रदेश (Aligarh, Uttar Pradesh), 15 जनवरी 2020। लालची शेर नहीं! गीदड़ और ग़द्दार होता है !!
आज डॉ संजय जैसा गीदड़ और गद्दार इस समाज में पैदा हो गया है। जिसने समाज की गरीब, भोली भाली कौम को इस्तेमाल कर अपने ही घर में, अपने स्वार्थ में, भाजपा को बैठा लिया है। भाजपा वह पार्टी है जो कुत्ते पालती है। जो अपनी रोटी के लिए के लिए अपने सामज पर तो भोंकता है और लेकिन मालिक के पैर चाटता है।
     जब वर्तमान केन्द्र सरकार के मंत्री थावरचंद गेहलोत ने जुलाई में मानसून सत्र के दौरान कहा था कि निषाद को आरक्षण केवल केंद्र सरकार ही दे सकती है तो, वर्तमान उत्तर प्रदेश की भाजपा की योगी सरकार ने 21, और 22 दिसम्बर 2016 के तत्कालीन अखेलश यादव सरकार के दिये हुए 17 जातियों के आरक्षण के शासनादेशों को एक शाजिश के तहत वापिस लेकर वीर शहीद अखेलश निषाद के वलिदान को बर्बाद करने का कार्य किया और गद्दार डॉ. संजय निषाद और उसका भाजपा सांसद बेटा के मुंह से आज तक भाजपा की योगी मोदी की सरकार के खिलाफ एक शब्द भी नहीं निकला।
    आज डॉ. संजय निषाद लोगों को 2022 का सपना दिखाकर अपने नालायक और बलात्कारी बेटों को प्रोजेक्ट करता घूम रहा है, जिससे विधान सभा चुनाव से पहले होने वाले ग्राम पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव में समाज के वोटों को बेचकर अपनी जेबें भरकर समाज को बेवकूफ बनाया जा सके।
   पार्टी में कुछ ऐसे कार्यकर्ता जो पैसे के लिए रूठे ते वे भी इसी शर्त पर पार्टी में वापिस लौट आए हैं कि अब टिकिट में पैसा का बटवारा करना होगा। ऐसे कार्यकर्तओं को अब आरक्षण पर भाजपा सरकार का विरोध करने की हिम्मत रही है और न डॉ. संजय निषाद में।
      अगर डॉ. संजय समाज का हितैषी है तो पहले भाजपा से आने वाले लोकसभा के बजट सत्र में निषादों के आरक्षण को लागू कराने के लिए बिल पास कराये और अगर मोदी और योगी की भाजपा सरकारें निषाद आरक्षण पर कोई कार्यवाही नहीं करती हैं तो, डॉ. संजय निषाद अगर निषाद वंश का शेर है तो, बजट सत्र के अंत में तुरंत भाजपा के साथ हुए कथित गठबंधन को तोड़ने की घोषणा करे और इसका बेटा अगर निषाद वंश की औलाद है और शेर कहलाता है तो, वह भी लोकसभा के सत्र के दौरान अपना त्याग पत्र देकर समाज के बीच आये। अगर डॉ. संजय निषाद और उसकी औलाद में निषादों के लिए इस प्रकार का वलिदान करने की हिम्मत नहीं है तो,
    समाज को यह मानने में कोई दिक्कत नहीं होगी कि डॉ. संजय और उसका परिवार न केवल गद्दार है, वल्कि अपने लाभ के लिए-
    अखिलेश निषाद (इटावा की मड़ैया दिलीप नगर के आत्मा राम निषाद का इकलौता बेटा, जिसने 7 जून को गोरखपुर के कसर्बल में हुए निषाद आरक्षण के रेल रोको आंदोलन में डॉ. संजय के इसारे पर अपनी जान न्यौछावर कर दी),
     हरनाथ बिन्द (गाज़ीपुर में 30 नवम्बर 2018 को डॉ. संजय निषाद के कहने पर आंदोलन में भाग लेने गये और पुलिस ने 2 बेटों सहित पकड़कर बुरी तरह से मार पीट कर जेल में डाल दिया था और जिनकी पिछले साल फरवरी में जेल में ही मौत हो गई)
     और सुल्तानपुर की कंचन निषाद (जो 20218 के गोरखपुर के लोकसभा उपचुनाव में प्रवीण निषाद का प्रचार करके लौट रही थी तब प्रतापगढ़ के रेलवे स्टेशन पर उतरते समय रेल से कटकर मर गई)
    इन सभी की मौतों का गुनाहगार और हज़ारों लोगों पर दर्ज हुए मुकद्दमों का दोषी भी है।
       डॉ. संजय ने अपने बेटे के दुबारा सांसद बनने पर 7 जून 2019 को वीर शहीद अखिलेश निषाद की कुर्बानी को ही भुला दिया और अपना जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाया और पूरे उत्तर प्रदेश में जन्मदिन का केक कटवाया। 7 जून 2019 को जितने भी निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने वीर शहीद अखेलश निषाद के बलिदान को भूलकर डॉ. संजय निषाद का जन्मदिन मनाया वे भी डॉ. संजय के जितने ही ग़द्दार कहे जा सकते हैं।
      डॉ. संजय को मालूम है कि अगर आज भाजपा की सरकारों पर निषाद वंश के आरक्षण के लिए दबाब बनाया जाय तो पूर्ण बहुमत की सरकार इसे आसानी से लागू कर सकती है। लेकिन यह ग़द्दार नहीं चाहता है कि निषाद अनुसूचित जाति का आरक्षण लागू हो। क्योंकि अगर आरक्षण भाजपा सरकार ने लागू कर दिया तो समाज को तो बड़ा लाभ मिल जाएगा लेकिन इसकी राजनीति खत्म हो जाएगी।   
    इसलिए ऐसे समाज द्रोही से समाज को बचाने की बड़ी आवश्यकता है। अन्यथा समाज को गड्ढे में जाने से कोई नहीं रोक सकता है। जैसे आज निषादों के बालू खनन और नौका पर योगी मोदी सरकार छीन रही है। और डॉ. संजय निषाद और इसका परिवार समाज को गुमराह करता घूम रहा है।