आरक्षण बचाओ महापंचायत ने भरी हुंकार: अब 2024 में नहीं रहने देंगे बीजेपी सरकार

लखनऊ, उत्तर प्रदेश (Lucknow, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो रिपोर्ट, 17 सितंबर 2022। आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आरक्षण बचाओ महापंचायत का आयोजन किया गया। इस महापंचायत में वक्ताओं ने एक स्वर से नारा लगाया - 

आरक्षण बचाओ महापंचायत ने भरी हुंकार

अब 2024 में नहीं रहने देंगे बीजेपी सरकार


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   दिनांक 17/9/2022 को  17 जातियों  को अनुसूचित जाति‌ में शामिल करने हेतु 17 अति पिछड़ी जातियों  के प्रतिनिधियों की महापंचायत चौधरी चरण सिंह सहकारिता भवन लखनऊ में श्री कामता प्रसाद निषाद जी पूर्व विधायक की अध्यक्षता में हुई। कार्यक्रम का संचालन श्री रमेश प्रजापति जी (मोदीनगर, गाजियाबाद, पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री/ राष्ट्रीय सचिव समाजवादी पार्टी) ने किया। 

   महापंचायत के संयोजक डॉ. राजपाल कश्यप जी (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष समाजवादी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ/ पूर्व मन्त्री/ पूर्व एम एल सी) थे।

   इस अवसर पर श्री बिशम्भर प्रसाद निषाद जी (पूर्व सांसद/ पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार/ राष्ट्रीय महासचिव समजवादी पार्टी) ने अपने संबोधन में कहा: बीजेपी के पालतू तीतरों को अपने इलाके में न घुसने दें, बहिष्कार करें, इनका हुक्का पानी बन्द करें और जब इनका अपमान होगा तो ये अपने आका से जाकर रोयेंगे और कहेंगे कि हमारी बेज्जती हो रही है। इसके बाद ही बीजेपी सरकार आपका परिभाषित एससी आरक्षण लागू करने को मजबूर होगी। किलिक करके देखें वीडियो


   श्री दयाराम प्रजापति जी (इटावा, पूर्व मंत्री/ पूर्व एम एल सी), श्री शंख लाल मांझी जी (पूर्व मंत्री), श्री किरणपाल कश्यप जी (पूर्व मंत्री), श्री हरिश्चन्द्र प्रजापति जी (बुलन्दशहर पूर्व प्रदेश महासचिव सपा पिछड़ा वर्ग), श्री सत्यवीर प्रजापति जी एडवोकेट (मुजफ्फरनगर, पूर्व प्रदेश सचिव समाजवादी पार्टी),  आचार्य पूरनमल प्रजापति अलीगढ़ सहित सैंकड़ों गणमान्य लोगो ने उपस्थित होकर महापंचायत को सम्बोधित करते हुए भाजपा सरकार द्वारा 17 जातियों की उपेक्षा और समाजवादी पार्टी के द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की।


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लखनऊ, उत्तर प्रदेश (Lucknow, Uttar Pradesh), एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो रिपोर्ट। देखें सपा की अखिलेश यादव सरकार का 17 जातियों को परिभाषित करने का 22 दिसम्बर 2016 का क्या था निर्णय। 

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   समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव / पूर्व सांसद / पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार मा. विशम्भर प्रसाद निषाद जी द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार समाजवादी पार्टी ने, उत्तर प्रदेश की 17 अतिपिछड़ी जातियों को उनकी अनुसूचित जाति में परिभाषित किया था और परिभाषित करने का अधिकार राज्य सरकार को होता है। इसकी सूचना केंद्र सरकार को भी भेजी गई थी। लेकिन इस शासनादेश के खिलाफ बीजेपी समर्थक गोरखपुर की संस्था अंबेडकर संस्थान और अंबेडकर ग्रंथालय के द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी, जिस पर 29 मार्च 2017 को कोर्ट ने इन जातियों के प्रमाण पत्र बनाने की शर्तानुसार इजाजत दी थी कि, इस दौरान बने प्रमाण पत्रों का भविष्य याचिका के परिणाम पर निर्भर करेगा और राज्य सरकार को 6 सप्ताह में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का समय दिया था, लेकिन चूंकि मार्च 2017 में चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा की योगी आदित्यनाथ जी की सरकार बन गई, जिसने जानबूझकर 5 साल से ज्यादा समय तक अपना एफिडेविट इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल नहीं किया। क्योंकि बीजेपी की योगी सरकार को डर था कि, अगर हाई कोर्ट ने 17 जातियों को परिभाषित करने के सपा की अखिलेश यादव सरकार के शासनादेश को सही मानकर प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दे दिया तो, बीजेपी को बड़ा नुकसान हो जाएगा। क्योंकि इन जातियों की उत्तर प्रदेश में 13 प्रतिशत से ज्यादा अवादी है और यह एक बड़ा वोट बैंक है।
    बीजेपी ने निषाद वंश की इन जातियों को अनुसूचित जाति के दर्जा देने के स्थान पर, निषादों में सबसे बड़े लालची और पैसों और पद के लिए कुछ भी करने को तैयार रहने वाले संजय कुमार निषाद को अपने पाले में कर लिया। इसके बदले, पहले संजय कुमार निषाद के बेटे प्रवीण कुमार निषाद को 2019 में गोरखपुर से हटाकर संत कबीर नगर से भाजपा का सांसद बनाया गया और फिर 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले खुद संजय कुमार निषाद को भाजपा कोटे से एमएलसी नॉमिनेट कराया गया। और 2022 के विधानसभा चुनाव में संजय कुमार निषाद के छोटे बेटे सरवन निषाद को भाजपा से विधायक जिताया गया। चुनाव बाद उत्तर प्रदेश सरकार में संजय कुमार निषाद को मत्स्य विभाग का मंत्री बनाया गया। और जब वीर शहीद अखिलेश निषाद, हरिनाथ बिंद और कंचन निषाद की शहादत और हज़ारों निषादों को जेल और मुकद्दमों में फँसवाने के बाद अपना घर सैकड़ों करोड़ विधायक की टिकट बेचकर कमाने वाले संजय कुमार निषाद से परिभाषित एससी आरक्षण को लागू करने के लिए हर जगह सवाल होने लगे तो, इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहे परिभाषित आरक्षण के केश पर एक शाजिश के तहत, अखिलेश यादव सरकार के आदेश को खारिज खुद योगी आदित्यनाथ जी की सरकार ने करा दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट में 17 जातियों के परिभाषित एससी आरक्षण का विरोध करने वाले दोनों अंबेडकर ग्रंथालय और गोरख प्रसाद गोरखपुर के रहने वाले हैं।

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    नई दिल्ली (New Delhi), एकलव्य मानव संदेश ब्यूरो रिपोर्ट, 31 अगस्त 2022। विमुक्ति जाति दिवस पर बीजेपी की योगी सरकार के रामराज्य में निषादों को मिला धोखा: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 17 जातियों का अखिलेश यादव सरकार में दिया गया 17 जातियों का एससी आरक्षण आदेश किया रद्द।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद परिभाषित SC आरक्षण के सबसे बड़े पैरोकार, मा.विशम्भर प्रसाद निषाद जी (राष्ट्रीय महासचिव सपा/ पूर्व सांसद/ पूर्व मंत्री उ. प्र. सरकार) की प्रतिक्रिया सुनने के लिए वीडियो को किलिक कीजिए।


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7 जून 2022 के कार्यक्रम की वीडियो एकबार ध्यान से देखें।

वीडियो को किलिक करके सुनिए 7 जून 2022 को अखिलेश निषाद के पिताजी श्री आत्माराम निषाद जी ने क्या कहा और क्यों की सीबीआई जांच की मांग


 7 जून की घटना के बाद वीर शहीद अखिलेश निषाद के घर पहुंच कर समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि मंडल ने मा. विशम्भर प्रसाद निषाद जी के नेतृत्व में दी थी 3.5 लाख रुपए की नकद आर्थिक मदद। देखें


समाजवादी पार्टी के एमएलसी डॉ. राजपाल कश्यप जी ने विधान परिषद में देखें निषादों के परिभाषित एससी आरक्षण पर किसे कहा धोखेबाज

 निषाद बिन्द कश्यप समाज सहित 17 पुकारू जातियों के परिभाषित आरक्षण के लिए अखिलेश निषाद और अमर शहीद हरिनाथ बिन्द जी ने अपनी जान की कुर्बानी दे दी थी! 7 जून 2015 के गोरखपुर के कसरबल काण्ड में इटावा के श्री आत्माराम निषाद के तीन बेटियों के बीच इकलौते बेटे और बीएससी द्वतीय वर्ष के छात्र अखिलेश निषाद ने जब अपनी जान कुर्बान कर दी तो, तत्कालीन समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार ने पार्टी के निषाद बिन्द कश्यप प्रजापति राजभर नेताओं के अनुरोध पर अखिलेश निषाद के परिवार को 10 लाख रुपये की सरकारी सहायता के साथ 3.5 लाख रुपये, अपने नेताओं को मा. विशम्भर प्रसाद निषाद जी के नेतृत्व में इटावा की मड़ैया दिलीप नगर, वीर शहीद अखिलेश निषाद के घर भेजकर नकद मदद दी। और 17 जातियों के परिभाषित एससी आरक्षण को 22 दिसम्बर 2016 को लागू किया था। लेकिन भाजपा के इशारे पर गोरखपुर के अंबेडकर संस्थान और अंबेडकर ग्रंथालय के पदाधिकारियों ने इस पर स्टे ले लिया था। इस स्टे पर 29 मार्च 2017 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शर्त के साथ रोक हटा दी थी और उत्तर प्रदेश सरकार से 6 सप्ताह के काउंटर एफिडेविट मांगा था। क्योंकि मार्च 2017 में भाजपा की योगी आदित्यनाथ की सरकार बन गई थी तो, उसने आज तक 5 साल बीतने के बाद भी परिभाषित आरक्षण को लागू करने के लिए, अपना एफिडेविट दाखिल नहीं किया है। 

    अखिलेश यादव सरकार के आरक्षण के आदेश को लागू कराने के लिए निषादों ने 29 दिसम्बर 2018 को गाजीपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली को रोकने के लिए 5 स्थानों पर सड़क जाम कर दी थीं। इसी जाम में एक कठवा मोड़ घटना घटित हो गई, जिसमें आंदोलन रोकने के लिए निषादों पर बल प्रयोग करने के दौरान पैर फिसलने से गिरने पर, कटे पेड़ की लकड़ी से सिर टकराने पर एक पुलिस कर्मी की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद इलाके के निषादों के अनेकों गांव में योगी आदित्यनाथ की पुलिस ने तीन दिन तक भयंकर तांडव मचाया था और सैकडों निर्दोष निषाद महिला, पुरुष और नाबालिग बच्चों को बेरहमी से मार मार कर जेल में डाल दिया था। इसी घटना में 2 बेटों सहित बुजुर्ग हरिनाथ बिन्द जी को भी बुरी तरह से मारपीट कर पुलिस ने जेल में डाल दिया था और 28 फरवरी 2018 को हरिनाथ बिन्द जी की इलाज के अभाव में जेल में ही मौत हो गई और परिवार को आज तक कोई सरकारी सहायता योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार ने नहीं दी।  

सुनिए कठवा मोड़ काण्ड के पीड़ित निषादों की दास्तान



  




  भाजपा के धन और पद के लालची नेताओं के लालच के कारण उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ जी की सरकार 5 साल से कोर्ट में अपना जबाब ही दाखिल नहीं कर रही है!! इससे ज्यादा शर्मनाक इस समाज के लिए क्या हो सकता है ?? 

समाज को दिखा देकर भाजपा की मदद कर मौज उड़ा रहे नेता के बोल सुनें








परिभाषित आरक्षण पर मा. विशम्भर प्रसाद निषाद जी के प्रयासों को देखने के लिए नीचे दी गईं लिंकों को किलिक कीजिये:





























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